भारतकोश
संतति शास्त्र

संतति शास्त्र

Santati Shastra

पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा

स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)

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सन्तति-शास्त्र ।

वाली सन्तान उत्पन्न होगी । यदि पिता शोकयुक्त हो तो वीर्यसे उत्पन्न होनेवाले, और यदि माता शोकयुक्त हो तो, रजसे उत्पन्न होनेवाले अंग निस्तेज होंगे ।

( श० क० )

४. गर्भवतीके हर्षयुक्त रहनेसे उत्तम शरीरवाली और लम्बी सन्तान उत्पन्न होती है । ( श० फ० )

५. गर्भसमयमें हर्ष-विषाद दोनोंके होनेसे श्रौस्त दर्जेंकी लम्बी और चली सन्तान होती है । ( श० क० )

६. यदि गर्भवती विषादयुक्त हो तो छोटे कद और दुष्ट स्वभावकी सन्तान होती है । ( श० क० )

७. गर्भोद्यान समयमें मातापिताके हर्षित होनेसे उत्तम और बड़े डीलडोलकी सन्तान होती है । ( श० क० )

८. माताकी मैथुनकी इच्छा न हो और विना इच्छाके मैथुनसे गर्भ रह जाय, तो टेढ़ी सन्तान होती है ।

च० श० अ० २ श्ल० १२ )

९. मातापिता यदि ईर्षायुक्त और मन्द हर्ष अर्थात् अच्छी तरहसे प्रसन्न न होकर गर्भोद्यान करें, तो ईर्षा करनेवाली सन्तान उत्पन्न होती है ।

इस प्रकार गर्भोद्यान समय और गर्भ समयमें हर्ष, शोक और चिन्तासे अनेक प्रकारको सन्तान उत्पन्न होती है । अतः पत्र मातापिताको अत्यन्त सावधानीसे गर्भोद्यानके समय हर्षयुक्त और प्रसन्न रहना चाहिये ।

(३६) माता-पिताके दूषित व्यवहारोंका

सन्तानपर प्रभाव ।

जैसा व्यवहार माता-पिताका गर्भोद्यान और गर्भस्थितिमें