संतति शास्त्र
Santati Shastra
पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा
स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंमनुष्याकृति भिन्न भिन्न क्यों होती है ? २२५
रूप रंगके विषयमें दृष्टि और चिन्तवनसे प्रभावशाली होता है। क्योंकि अंगरेजोंके यहाँ गोरी ही सन्तान होती है, चाहेवे किसी देशमें रहें। इसी प्रकार काबुली, चीनी, जापानी और रंगूली कहीं रहते हुए अपने ही रूप रंगके अनुसार सन्तान उत्पन्न करते हैं। इसका कारण यह है कि प्रायः इनका भोजन दूसरे देशमें जाकर नहीं बदलता, परन्तु भारतमें यह बात नहीं है। बंगाली और मदरासी भारतके ही दूसरे प्रान्तोंमें जाकर भोजन बदल देते हैं। इनको पञ्जाब ऐसे देशमें जाकर चावलके साथ गेहूँ खानेकी वान पड़ जाती है इत्यादि। इस प्रकार भोजन बदल जाने या उसमें हेर फेर हो जानेसे शरीरकी धातुओंमें कमी वेशी हो जाती है। इस कारण भारतीय भारत के दूसरे प्रान्तोंमें जाकर वहाँके अनुसार सन्तान उत्पन्न करते हैं। इतना ही नहीं, एक ही स्थान और एक ही माता-पितासे दो रंगकी सन्तान उत्पन्न होती है। पहला लड़का गोरा दूसरा काला, इसका कारण भी भोजनका हेर फेर है, जैसे जाड़ेके दिनोंमें गरम पदार्थों और गरमियोंमें ठंडी वस्तुओंका अत्यन्त सेवन इत्यादि। इस प्रकार अनेक रङ्गकी सन्तानें उत्पन्न होती हैं कि जिनका मुख्य कारण जलादि धातु हैं और वे भोजन किये हुए पदार्थोंसे बनती हैं। अतएव भोजनके पदार्थोंका संशोधन करके मनुष्य मन-चाहे रङ्गकी सन्तान उत्पन्न कर सकता है; क्योंकि जिस धातुकी इच्छा हो वह मुख्य रीतिसे भोजनके पदार्थों द्वारा विशेष रूपसे उत्पन्न हो सकती है।
(५४) मनुष्याकृति भिन्न भिन्न क्यों होती है ?
संसारमें जितने मनुष्य हैं सबके चेहरेकी बनावट अलग अलग होती है। एकका चेहरा दूसरेसे नहीं मिलता। बहुत
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