संतति शास्त्र
Santati Shastra
पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा
स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)
पृष्ठ 259, कुल 302 में से
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सन्तति-शास्त्र ।
कारण यह है कि बच्चा फिलीको फाड़कर निकलता है । दूसरा कारण यह कि गर्भाशयमें चिपटी हुई खेडी वच्चेके साथ बाहरको खिचती है । पहले पहल बच्चा होनेवाली स्त्रियोंको विशेष पीडा इस कारण होती है कि उनके श्रवयोंका फैलाव कमी नहीं हुआ है । स्त्रीके पास जिस समय दाई पहुँचे उसे पहले हाथके नार्वून काट डालना चाहिये । सफेद कपड़े कि जिनमें कुछ भी गन्धगी न हो पहनना चाहिये, हाथमें किसीप्रकारका जेवरा जैसे अँगूठी इत्यादि जिससे प्रसूताको चोट लगनेका भय हो, निकाल देना चाहिये । दाईके अतिरिक्त दो चतुर स्त्रियाँ और भी हों । इनको भी दाईके अनुसार सफाईसे श्रन्दर जाना चाहिये । प्रायः पैंसी नासमभू और वैहदी दाइयाँ या अन्य स्त्रिया प्रसूताको डराती और धमकाती हैं । यह बहुत बुरी बात है । पैंसा करनेसे बच्चा रुक जाता है । जिस समय दाई प्रसूताके पास पहुँचे उसको सबसे पहले यह देखना चाहिये कि गर्भाशयका मुख खुला है या नहीं । यदि मुख नहीं खुला है तो कोई बात नहीं । अगर मुख खुला है तो बच्चा श्रवण्य होगा । पैंसी दशामें अंगरेजी रीतिके अनुसार पलंगपर लेटा देना चाहिये । जब स्त्री चित्त लेट जावे तो दोनों कोखोंको टटोलकर यह देखना चाहिये कि बच्चा किस ओर और किस तरफ है । यह ईश्वरका नियम है कि हमेशा बच्चेका सर नीचे और पैर ऊपरको होते हैं, परन्तु कभी कभी इसका उलटा भी हो जाता है । कभी बच्चा टेढ़ा होकर आडा हो जाता है । ये कठिन दशार्थ ह ।
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जब गर्भाशयमें बच्चेका सर ऊपर होता है, तब पहले पैर निकलते हैं । जब बच्चा टेढ़ा हो जाता है, तो वह पैरके बल न सिर के बल पैदा होता है । पैंसी दशामें चतुर दाइयोंसे काम