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संतति शास्त्र

संतति शास्त्र

Santati Shastra

पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा

स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)

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बच्चोंका मल मूत्र और नींद ?

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२ जब तक बच्चा अच्छी तरह अन्न न खाने लगे संयोग न करना चाहिये। ( रविशास्त्र )

२. धर्मशास्त्रका मत ।

१. दांत निकलनेके बाद संयोग करना चाहिये। ( शक्तिगृति १६२ )

२. बच्चेके दूध पीनेके समयतक संयोगा न होना चाहिये। ( प्रा० ४० )

इस विषयमें प्रायः सबका मत एक ही सा है। बच्चा प्रायः दो साल दूध पीता है। इसके बाद अन्न खाने लगता है। यदि बच्चेके दूध पीनेके समय संयोग किया जाय तो दूध विगड़ जानेका भय रहता है। एक विद्वान की राय है कि बच्चा पैदा होनेके एक सालतक भीतरी अवयव पुष्ट होते हैं ( श० ६० )

इसलिये दो वर्ष बच्चेको दूध पिलाकर जब वह अन्न खाने लागे इसके बाद संयोग होना चाहिये, नहीं तो बच्चे और माता दोनोंको बहुत बड़ी हानि होनी है।

( ६४ ) बच्चोंका मल मूत्र और नींद ।

बच्चोंकी स्वास्थ्य-परीक्षा करनेके लिये तीन बातें देखनी आवश्यक हैं। मल, मूत्र और नींद। जब ये बातें ठीक हों, तो बच्चोंको निरोग समझना चाहिये। इन बातोंपर पैदा होते समयसे ही ध्यान रखना आवश्यक है। सबसे पहले बच्चे के पेशाबको देखना जरूरी है। प्रायः दूध पीनेके बाद पेशाब होता है। जब पेशाबके मुकासपर मैल लगा हो, तो बड़ा कष्ट होता है। उस समय उसको पेशाबका वेग सहना पड़ता है। इस-