भारतकोश
संतति शास्त्र

संतति शास्त्र

Santati Shastra

पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा

स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)

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सन्तति-शास्त्र ।

२. कानके रोग ।

१. जो माताएँ सोते हुए बच्चेको दूध पिलाती हैं उन बच्चों-में दूध कानमें आ जाता है इससे अनेक रोग हो जाते हैं। ( श० क० )

१ बहरापन २ कानका बहना ३ कानका नासूर ४ परदेका मोटा पड जाना ५ परदेकी सूजन इत्यादि ।

३. शरीरमें गरमीका परिवर्तन ।

१. माताके पास सोनेसे बच्चेमें माताके शरीरकी गरमी-का प्रवेश हो जाता है । जो गरमी बच्चोंमें होती है उससे अधिक पहुँचनेमें हानि है । जब कभी माताको ज्वर आता है तो वह बच्चेको अलग नहीं सुलाती । पास सोने और ज्वरका दूध पीनेसे बच्चेको भी ज्वर आ जाता है ।

४. श्वाँस-रोग ।

१. पास सोनेवाले बच्चोंमें माताके श्वाँस रोगका संचार हो जाता है । इस कारण कि माताके पेटसे निकली हुई श्वाँस बच्चेकी श्वाँसके साथ मिल कर अन्दर पहुँचती है और वहाँ फेफड़ोंको खराब कर देती है । यह दशा उस समय होती है जब कि माता और बच्चा दोनों मुँह बन्द करके जाड़ेमें एक लिहाफके अन्दर सोते हैं ।

अतएव बच्चोंको ऐसी थान डालनी चाहिये कि जिससे वे रातमें खूब सोवें । दिनमें इतना न सुलाना चाहिये कि रातमें खूब जागें । यदि इनको रातमें नींद न आवे तो वो वातें समझनी चाहिये—भूख और कुपच । इस प्रकार अलग न सोनेसे बच्चे