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संतति शास्त्र

संतति शास्त्र

Santati Shastra

पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा

स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)

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विचारसूत्र और कार्यक्रम ।

जनवरी सन् १९२० ई० कि जबसे मैंने भार्गव पत्रिकाका सम्पादन-कार्य छोड़ा, उसी समयसे हिन्दी भाषामें सन्तान स्वन्ध्नी एक ग्रंथ लिखनेका विचार मेरे चित्तमें उत्पन्न हुआ । प्रायः सोचा करता था कि अपने मनोरथको किन्तु प्रकार पूरा करूँ । कभी अपनी अयोग्यताकी श्रांर देखकर निराश होता, कभी सेवा-प्रणाली सुखद और हृदय-आहिष्णी न होनेसे लज्जित होता था, परन्तु एक लालायित हृदय अपनी लालसाको पूरी किये बिना कैसे रहे ? ज्यों ज्यों दिन व्यतीत होते थे चित्त कार्य-क्षेत्रमें प्रवेश करना चाहता था । ज्यों ज्यों लालायित हृदय पर विचारों की चर्चा होती थी, अधीर्य होता जाता था । उत्साह नित्य चर्चा-कालीन नदीके समान बह रहा था, विचारोंनी तरंगें उत्साह-रूपी नदीमें मौजे मारती थीं, चित्त मनोरथ-रूपी नव विकसित सुमनको ले किसी सुसम्पति रूपी नौकाके सहारे अथाह नदीके पार होना चाहता था । कितने ही दिवस इसी भाँति व्यतीत हुए । एक दिन मैंने अपने विचारोंको सह-धर्मिणीसे कहा । कुछ देर बाद मुझे यह उत्तर मिला कि—

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