भारतकोश
संतति शास्त्र

संतति शास्त्र

Santati Shastra

पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा

स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)

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सन्तति-शास्त्र ।

इतनी जल्दी क्यों रजवती होती है ? जहाँतक पता चला, बात यह मालूम हुई कि वहाँका भोजन और व्यवहार ही इस रीतिका है । सबसे पहले भोजनको देखिये । वहाँ सब साधारणमें मछली खानेकी प्रथा है । क्या मछली कुछ कम कामोद्दीपक है ? क्या वहाँ स्त्रियोंका भ्रृंगार और प्रान्तोंसे कम है ? अतएव इस बातको मान लेना पड़ेगा कि जिन कारणोंसे कन्यायें जल्द रजवती होती हैं यद्गुलमें उनकी कमी नहीं है, मत्स्य अधिकता ही है । वे यद्गुली कि जो पञ्जाबके सर्व जिलों में बहुत दिनोंसे हैं, उनके यहाँ भी दस वर्ष की कन्यायें रजवती होती देखी गयी हैं । इससे साफ जाहिर है कि भोजन और खाने पीने आदिकी स्वतंत्रता ही पर रजस्वला होनेका समय निर्भर है ।

हम उन्हीं स्त्रियोंको निरोध मानेंगे कि जिनका ठीक समय पर रजोधर्म प्रारम्भ हुआ हो और हर महीनेमें ठीक ठीक होता हो । जो समय रजोधर्म प्रारम्भ होने का है ? उस समय कन्याओंके शरीरकी क्या कैसी होनी चाहिये ? उस समय वे खिलनेवाली फलीके समान फोमल, और चढ़ती हुई नदी के समान बढ़नेवाली होती हैं । ऐसे समयमें कन्याओंका अंग बढ़ता है, मनकी शक्तियोंका विकास होता है । अगड़े, फल-वाहिनी नली और गर्भाशय पूर्ण रूपसे खिलते हैं । ऐसे समयमें यदि कोई इनसे सन्तान उत्पन्न करनेकी इच्छा करे, तो उसके बराबर मूर्ख कौन होगा ।

समय और गरज दोनों बलवान हैं । सूखोंकी कौन कहे, अच्छे पड़े लिये, ताजे दिमागवालोंके इदयपर यह बात तोट रही है कि रजस्वला होते ही कन्याओंमें संयोग-शक्ति आ जाती है । पर यह बड़ी भारी भूल है । रजस्वला होना एक बात है