सात्वत संहिता (पाञ्चरात्र आगम - भगवान् सङ्कर्षण-नारद संवाद सान्वय सटीक)
Satvata Samhita of Pancharatra Agama with Commentary
भगवान् सङ्कर्षण / महर्षि नारद द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंवर्णसंकेतानुक्रमणिका अक्षस्थ — प्रणव | (१७.१८९) अराच्चतुर्दश — औकार | नाभेस्त्रयोदश — ओकार अरावसान — विसर्ग | नाभ्यपर — आकार अरोपान्त्य — अनुस्वार | नाभ्येकादश — एकार अष्टमाद् द्वितीयं वर्णम् — तकार | नेमि — मकार अष्टमारगं प्राग्वर्णम् — णकार | नेमितृतीय — रेफ आद्यमेकादशाद् — पकार | नेमि द्वितीय — यकार एकादशादाद्यं — पकार | नेमिषष्ठम् — शकार दशमाद् द्वितीयम् — नकार | नेमेरष्टकम् — सकार दशमारस्थ — धकार | नेमेरेकोनविंशाख्यवर्ण — बकार द्वितीयस्वर — आ | (१७.१८७) नवमादपरम् — दकार | नेमेर्द्वितीयं वर्णम् — यकार नवमाद् द्वितीयं वर्णम् — दकार | नेमेर्नवमवर्ण — टकार नाभि — अकार | नेमेस्तृतीयं वर्णम् — रेफ नाभितुर्य — इकार | नेमेः पञ्चमं वर्णम् — वकार नाभितुर्यासनस्थित — वकार | पञ्चमारगम् — उकार नाभितृतीय — इकार | लान्त — व नाभिद्वितीय — आकार | षष्ठस्वर — ऊ नाभिपूर्व — यकार | सान्त — ह नाभिसप्तमवर्ण — सकार | हंसार्ण (१८.१००) — हकार *