भारतकोश
सात्वत संहिता (पाञ्चरात्र आगम - भगवान् सङ्कर्षण-नारद संवाद सान्वय सटीक)

सात्वत संहिता (पाञ्चरात्र आगम - भगवान् सङ्कर्षण-नारद संवाद सान्वय सटीक)

Satvata Samhita of Pancharatra Agama with Commentary

भगवान् सङ्कर्षण / महर्षि नारद द्वारा

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श्लोकार्धानुक्रमणिका ७२७ पदमिन्द्रियकोशाय ५४० | पद्मासनादिना चैव २९३ पदमेकादशार्णं तु ५९ | पद्मासनादिना मार्गे ४२५ पदानि पदमन्त्राणां ५२१ | पद्मासनेनोपविष्टा ३१४ पदासक्ताय तदनु ५३६ | पद्मासनेनोपविष्टं २७७ पदोपलक्षणं मन्त्रं २८२ | पद्मेनोर्ध्वगतेनैव ५७९ पदैरोङ्कारसंरुद्धैः ४७५ | पद्मं गदा ध्वनिश्चक्रं १७४ पदैः पूर्वोक्तसंख्यैस्तु ४२ | पद्मं दक्षिणपाणौ तु ३४९ पदं कृत्वा तु जुहुया- ४६७ | पद्मं स्वेनात्मनात्मानं ४४१ पदं चतुर्मूर्तये वै ५३७ | पयोभुक् परमेशं च ३७५ पदं चाखिलदुःखेति ५३४ | पयोभुग् वा निराहारो ३९० पदं जगत्प्रियायेति ६० | पयोयावकशाकाम्बु- ३७४ पदं तु द्व्यक्षरं षष्ठं ४९ | परण्डकस्य चोच्छ्राय- ६०४ पदं प्रकाशाशाय ५३२ | परत्र भवभीरूणा- ४०९ पदं ब्रह्ममायाऽथ ५३६ | परमाराधनं प्राग्वत् ३६ पदं रसनिधे कुर्यात् ५३९ | परमेतत् समाख्यात- ९ पदं वद वदादाय ५३३ | परदारस्पृहामुक्तः ५१६ पदं वेदविदे विश्व- ५३२ | परध्वनिस्वरूपेण ३५१ पदं सनत्कुमाराय ६० | परब्रह्मसमेतं च ५३५ पदं सहस्रार्चिषे तु ५३६ | परमः पालनीयश्च ५२१ पद्मखड्गगदावज्र- ३०० | पररूपस्य मध्ये तु १९० पद्मकं शङ्खपुष्पं च ४२२ | परस्परमुखौ कुर्यात् ६०३ पद्मकं च तृतीये तु ४२७ | परस्परमुखौ श्लिष्टौ ३६४ पद्मपत्रैस्तथाश्वत्थ- ३६८ | परस्य चात्मनो मन्त्री ३८१ पद्मरागसमानेन ४७ | परस्य ब्रह्मणः सम्यग् १९५ पद्मरागाचलाकार- ३५९ | परस्य ब्रह्मणः सोऽयं ३६५ पद्मरागाचलाकारं ३०६ | परत्वमनिरुद्धस्य १८६ पद्मध्वनिगदाशङ्खाः १७४ | पराक्रमाय शब्दं तु ५४० पद्मनाभं समभ्यर्च्य १८७ | पराङ्मुखं च सुस्पष्टं ९५ पद्मनाभादयो देवा २११ | परा गतिर्गुरुर्यस्मात् ४९९ पद्मनाभादिमूर्तीना- १५१ | परार्थतो वा स्वार्थेन ४०१ पद्मनाभाय वै विश्व- ५३१ | पराय पदमादाय ५३६ पद्मनाभो ध्रुवोऽनन्तः २११ | परावर्त्य शतं बुद्ध्या १३१ पद्मशङ्खौ सुशोभाढ्यौ १४० | परिच्युतमलः स्नातः २४ पद्मादीनां चतुर्णां तु १६९ | परिज्ञाय पुरा मूर्तिं ५४८ पद्माद्यं चातुरात्मीय- २६३ | परिज्ञानाद् भवेत् किन्तु २०४