भारतकोश
सत्यार्थ प्रकाश (महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती विरचित)

सत्यार्थ प्रकाश (महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती विरचित)

Satyarth Prakash - Swami Dayananda Saraswati

महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा

DevanagariHindipublished480 पृष्ठ

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पृष्ठ 305

एकादशसमुल्लासः ३०५

वे बहुत नाचने, कूदने, हंसने लगे। तब राजा ने पूछा कि यह क्या बात है। उन्होंने कहा कि साक्षात् नारायण हम को दीखता है।

( राजा ) हम को क्यों नहीं दीखता ?

( नारायणदर्शी ) जब तक नाक है तब तक नहीं दीखेगा और जब नाक कटवा लोगे तब नारायण प्रत्यक्ष दीखेंगे। उस राजा ने विचारा कि यह बात ठीक है।

ज्योतिषी जी ! मुहूर्त्त देखिये।

ज्योतिषी जी ने उत्तर दिया-जो हुकम अन्नदाता ! दशमी के दिन प्रातःकाल आठ बजे नाक कटवाने और नारायण के दर्शन करने का बड़ा अच्छा मुहूर्त्त है। वाह रे पोप जी ! अपनी पोथी में नाक काटने कटवाने का भी मुहूर्त्त लिख दिया। जब राजा की इच्छा हुई और उन सहस्र नकटों के सीधे बांध दिये तब तो वे बड़े ही प्रसन्न होकर नाचने, कूदने और गाने लगे। यह बात राजा के दीवान आदि कुछ-कुछ बुद्धि वालों को अच्छी न लगी। राजा के एक चार पीढ़ी का बूढ़ा ९० वर्ष का दीवान था। उस को जाकर उस के परपोते ने जो कि उस समय दीवान था; वह बात सुनाई। तब उस वृद्ध ने कहा कि वे धूर्त्त हैं। तू मुझ को राजा के पास ले चल। वह ले गया। बैठते समय राजा ने बड़े हर्षित होके उन नाककटों की बातें सुनाईं। दीवान ने कहा कि सुनिये महाराज ! ऐसी शीघ्रता न करनी चाहिए। विना परीक्षा किये पश्चात्ताप होता है।

( राजा ) क्या वे सहस्र पुरुष झूठ बोलते होंगे ?

( दीवान ) झूठ बोलो या सच, विना परीक्षा के सच झूठ कैसे कह सकते हैं?

( राजा ) परीक्षा किस प्रकार करनी चाहिए।

( दीवान ) विद्या, सृष्टिक्रम, प्रत्यक्षादि प्रमाणों से।

( राजा ) जो पढ़ा न हो वह परीक्षा कैसे करे ?

( दीवान ) विद्वानों के संग से ज्ञान की वृद्धि करके।

( राजा ) जो विद्वान् न मिले तो ?

( दीवान ) पुरुषार्थी को कोई बात दुर्लभ नहीं है।

( राजा ) तो आप ही कहिए कैसा किया जाय ?

( दीवान ) मैं बुड्ढा और घर में बैठा रहता हूं और अब थोड़े दिन जीऊंगा भी। इसलिए प्रथम परीक्षा मैं कर लेऊं। तत्पश्चात् जैसा उचित समझें वैसा कीजियेगा।

( राजा ) बहुत अच्छी बात है। ज्योतिषी जी ! दीवान जी के लिये मुहूर्त्त देखो।

( ज्योतिषी ) जो महाराज की आज्ञा। यही शुक्ल पञ्चमी १० बजे का मुहूर्त्त अच्छा है। जब पञ्चमी आई तब राजा जी के पास आ कर आठ बजे बुड्ढे दीवान जी ने राजा जी से कहा कि सहस्र दो सहस्र सेना लेके चलना चाहिए।

( राजा ) वहां सेना का क्या काम है ?

( दीवान ) आपको राज्यव्यवस्था की जानकारी नहीं है। जैसा मैं कहता हूं वैसा कीजिये।

( राजा ) अच्छा जाओ भाई, सेना को तैयार करो। साढ़े नौ बजे सवारी करके राजा सब को लेकर गया। उस को देख कर वे नाचने और गाने लगे। जाकर