सत्यार्थ प्रकाश (महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती विरचित)
Satyarth Prakash - Swami Dayananda Saraswati
महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा
पृष्ठ 379, कुल 480 में से
संदर्भ में पढ़ें| त्रयोदशसमुल्लासः | ३७९ |
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अथ त्रयोदशसमुल्लासारम्भः
अथ कृश्चीनमतविषयं व्याख्यास्यामः
अब इसके आगे ईसाइयों के मत विषय में लिखते हैं जिससे सब को विदित हो जाय कि इनका मत निर्दोष और इनकी बाइबल पुस्तक ईश्वरकृत है वा नहीं ? प्रथम बाइबल के तौरेत का विषय लिखा जाता है—
१—आरम्भ में ईश्वर ने आकाश और पृथिवी को सृजा ॥ और पृथिवी बेडौल और सूनी थी और गहिराव पर अन्धियारा था और ईश्वर का आत्मा जल के ऊपर डोलता था ॥ —तौरेत उत्पत्ति पुस्तक पर्व १। आय० १।२ ॥
( समीक्षक ) आरम्भ किसको कहते हो ?
( ईसाई ) सृष्टि के प्रथमोत्पत्ति को।
( समीक्षक ) क्या यही सृष्टि प्रथम हुई; इसके पूर्व कभी नहीं हुई थी ?
( ईसाई ) हम नहीं जानते हुई थी वा नहीं; ईश्वर जाने।
( समीक्षक ) जब नहीं जानते तो इस पुस्तक पर विश्वास क्यों किया कि जिससे सन्देह का निवारण नहीं हो सकता और इसी के भरोसे लोगों को उपदेश कर इस सन्देह के भरे हुए मत में क्यों फंसाते हो ? और निःसन्देह सर्वशङ्कानिवारक वेदमत को स्वीकार क्यों नहीं करते ? जब तुम ईश्वर की सृष्टि का हाल नहीं जानते तो ईश्वर को कैसे जानते होगे ?
आकाश किसको मानते हो ?
( ईसाई ) पोल और ऊपर को।
( समीक्षक ) पोल की उत्पत्ति किस प्रकार हुई क्योंकि यह विभु पदार्थ और अति सूक्ष्म है और ऊपर नीचे एक सा है। जब आकाश नहीं सृजा था तब पोल और अवकाश था वा नहीं ? जो नहीं था तो ईश्वर, जगत् का कारण और जीव कहां रहते थे ? विना अवकाश के कोई पदार्थ स्थित नहीं हो सकता इसलिये तुम्हारी बाइबल का कथन युक्त नहीं। ईश्वर बेडौल, उसका ज्ञान कर्म बेडौल होता है वा सब डौल वाला ?
( ईसाई ) डौल वाला होता है।
( समीक्षक ) तो यहां ईश्वर की बनाई पृथिवी बेडौल थी ऐसा क्यों लिखा ?
( ईसाई ) बेडौल का अर्थ यह है कि ऊंची नीची थी; बराबर नहीं थी।
( समीक्षक ) फिर बराबर किसने की ? और क्या अब भी ऊंची नीची नहीं है ? इसलिये ईश्वर का काम बेडौल नहीं हो सकता क्योंकि वह सर्वज्ञ है, उसके काम में न भूल, न चूक कभी हो सकती है। और बाइबल में ईश्वर की सृष्टि बेडौल लिखी इसलिये यह पुस्तक ईश्वरकृत नहीं हो सकता। प्रथम ईश्वर का आत्मा क्या पदार्थ है ?
( ईसाई ) चेतन।
( समीक्षक ) वह साकार है वा निराकार तथा व्यापक है वा एकदेशी।