भारतकोश
सत्यार्थ प्रकाश (महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती विरचित)

सत्यार्थ प्रकाश (महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती विरचित)

Satyarth Prakash - Swami Dayananda Saraswati

महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा

DevanagariHindipublished480 पृष्ठ

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पृष्ठ 388

३८८ सत्यार्थप्रकाशः


( समीक्षक ) अब देखिये कि क्या-क्या ईसाइयों के ईश्वर की लीला ! कि जो लड़के वा स्त्रियों के समान चिढ़ता और ताना मारता है ! ! ! ॥२१॥

२२—तब परमेश्वर ने समूद और अमूरः पर गन्धक और आग परमेश्वर की ओर से स्वर्ग से वर्षाया॥ और उन नगरों को और सारे चौगान को और नगरों के सारे निवासियों को और जो कुछ भूमि पर उगता था; उलट दिया॥
—तौ० उत्प० पर्व० १९। आ० २४। २५॥

( समीक्षक ) अब यह भी लीला बाइबल के ईश्वर की देखिये कि जिसको बालक आदि पर भी कुछ दया न आई ! क्या वे सब ही अपराधी थे जो सब को भूमि उलटा के दबा मारा ? यह बात न्याय, दया और विवेक से विरुद्ध है। जिनका ईश्वर ऐसा काम करे उनके उपासक क्यों न करें ? ॥ २२॥

२३—आओ हम अपने पिता को दाख रस पिलावें और हम उसके साथ शयन करें कि हम अपने पिता से वंश जुगावें॥ तब उन्होंने उस रात अपने पिता को दाख रस पिलाया और पहिलोठी गई और अपने पिता के साथ शयन किया॥ हम उसे आज रात भी दाख रस पिलावें तू जाके शयन कर॥ सो लूत की दोनों बेटियां अपने पिता से गर्भिणी हुईं॥ —तौ० उत्प० पर्व० १९। आ० ३२। ३३। ३४। ३६॥

( समीक्षक ) देखिये पिता पुत्री भी जिस मद्यपान के नशे में कुकर्म करने से न बच सके ऐसे दुष्ट मद्य को जो ईसाई आदि पीते हैं उनकी बुराई का क्या पारावार है ? इसलिये सज्जन लोगों को मद्य के पीने का नाम भी न लेना चाहिये ॥२३॥

२४—और अपने कहने के समान परमेश्वर ने सरः से भेंट किया और अपने वचन के समान परमेश्वर ने सरः के विषय में किया॥ और सरः गर्भिणी हुई॥
—तौ० उत्प० पर्व० २१। आ० १। २॥

( समीक्षक ) अब विचारिये कि सरः से भेंट कर गर्भवती की यह काम कैसे हुआ ! क्या विना परमेश्वर और सरः के तीसरा कोई गर्भस्थापन का कारण दीखता है ? ऐसा विदित होता है कि सरः परमेश्वर की कृपा से गर्भवती हुई ! ! ! ॥ २४॥

२५—तब अबिरहाम ने बड़े तड़के उठ के रोटी और एक पखाल में जल लिया और हाजिरः के कन्धे पर धर दिया और लड़के को भी उसे सौंप के उसे विदा किया॥ उसने उस लड़के को एक झाड़ी के तले डाल दिया॥ और वह उसके सम्मुख बैठ के चिल्ला-चिल्ला रोई॥ तब ईश्वर ने उस बालक का शब्द सुना॥
—तौ० उत्प० पर्व० २१। आ० १४। १५। १६। १७॥

( समीक्षक ) अब देखिये ! ईसाइयों के ईश्वर की लीला कि प्रथम तो सरः का पक्षपात करके हाजिरः को वहां से निकलवा दी और चिल्ला-चिल्ला रोई हाजिरः और शब्द सुना लड़के का। यह कैसी अद्भुत बात है ? यह ऐसा हुआ होगा कि ईश्वर को भ्रम हुआ होगा कि यह बालक ही रोता है। भला यह ईश्वर और ईश्वर की पुस्तक की बात कभी हो सकती है ? विना साधारण मनुष्य के वचन के इस पुस्तक में थोड़ी सी बात सत्य के सब असार भरा है॥ २५॥

२६—और इन बातों के पीछे यों हुआ कि ईश्वर ने अबिरहाम की परीक्षा किई, और उसे कहा हे अबिरहाम ! तू अपने बेटे का अपने इकलौते इजहाक को जिसे तू प्यार करता है; ले। उसे होम की भेंट के लिए चढ़ा॥ और अपने बेटे इजहाक को बांध के उस वेदी में लकड़ियों पर धरा॥ और अबिरहाम ने छुरी लेके अपने