भारतकोश
सत्यार्थ प्रकाश (महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती विरचित)

सत्यार्थ प्रकाश (महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती विरचित)

Satyarth Prakash - Swami Dayananda Saraswati

महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा

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पृष्ठ 418

४१८ सत्यार्थप्रकाशः

और वह जनने को पीड़ित है॥ और दूसरा आश्चर्य स्वर्ग में दिखाई दिया और देखो एक बड़ा लाल अजगर है जिसके सात सिर और दस सींग हैं और उसके सिरों पर सात राजमुकुट हैं॥ और उसकी पूंछ ने आकाश के तारों की एक तिहाई को खींच के उन्हें पृथिवी पर डाला॥ —यो० प्र० प० १२। आ० १। २। ३। ४॥

( समीक्षक ) अब देखिये लम्बे चौड़े गपोड़े ! इनके स्वर्ग में भी विचारी स्त्री चिल्लाती है। उसका दुःख कोई नहीं सुनता, न मिटा सकता है। और उस अजगर की पूंछ कितनी बड़ी थी जिसने एक तिहाई तारों को पृथिवी पर डाला ? भला ! पृथिवी तो छोटी है और तारे भी बड़े-बड़े लोक हैं। इस पृथिवी पर एक भी नहीं समा सकता। किन्तु यहां यही अनुमान करना चाहिये कि ये तारों की तिहाई इस बात के लिखने वाले के घर पर गिरे होंगे और जिस अजगर की पूंछ इतनी बड़ी थी जिससे सब तारों की तिहाई लपेट कर भूमि पर गिरा दी वह अजगर भी उसी के घर में रहता होगा॥ ११६॥

११७—और स्वर्ग में युद्ध हुआ मीखायेल और उसके दूत अजगर से लड़े और अजगर और उसके दूत लड़े॥ —यो० प्र० प० १२। आ० ७॥

( समीक्षक ) जो कोई ईसाइयों के स्वर्ग में जाता होगा वह भी लड़ाई में दुःख पाता होगा। ऐसे स्वर्ग की यहीं से आशा छोड़ हाथ जोड़ बैठ रहो। जहां शान्तिभंग और उपद्रव मचा रहे वह ईसाइयों के योग्य है॥ ११७॥

११८—और वह बड़ा अजगर गिराया गया। हां ! वह प्राचीन सांप जो दियाबल और शैतान कहावता है जो सारे संसार का भरमानेहारा है॥ —यो० प्र० प० १२। आ० ९॥

( समीक्षक ) क्या जब वह शैतान स्वर्ग में था तब लोगों को नहीं भरमाता था ? और उसको जन्म भर बन्दीगृह में घिरा अथवा मार क्यों न डाला ? उसको पृथिवी पर क्यों डाल दिया ? जो सब संसार का भरमाने वाला शैतान है तो शैतान को भरमाने वाला कौन है ? यदि शैतान स्वयं भर्मा है तो शैतान के विना भरमनेहारे भर्मेंगे और जो भरमानेहारा परमेश्वर है तो वह ईश्वर ही नहीं ठहरा। विदित तो यह होता है कि ईसाइयों का ईश्वर भी शैतान से डरता होगा क्योंकि जो शैतान से प्रबल है तो ईश्वर ने उसको अपराध करते समय ही दण्ड क्यों न दिया ? जगत् में शैतान का जितना राज है उसके सामने सहस्त्रांश भी ईसाइयों के ईश्वर का राज नहीं। इसीलिये ईसाइयों का ईश्वर उसे हटा नहीं सकता होगा। इससे यह सिद्ध हुआ कि जैसा इस समय के राज्याधिकारी ईसाई डाकू चोर आदि को शीघ्र दण्ड देते हैं वैसा भी ईसाइयों का ईश्वर नहीं। पुनः कौन ऐसा निर्बुद्धि मनुष्य है जो वैदिक मत को छोड़ पोकल ईसाई मत स्वीकार करे ?॥ ११८॥

११९—हाय पृथिवी और समुद्र के निवासियो ! क्योंकि शैतान तुम पास उतरा है॥ —यो० प्र० प० १२। आ० १२॥

( समीक्षक ) क्या वह ईश्वर वहीं का रक्षक और स्वामी है ? पृथिवी के मनुष्यादि प्राणियों का रक्षक और स्वामी नहीं है ? यदि भूमि का भी राजा है तो शैतान को क्यों न मार सका ? ईश्वर देखता रहता है और शैतान बहकाता फिरता है तो भी उसको वर्जता नहीं॥ विदित तो यह होता है कि एक अच्छा ईश्वर और एक समर्थ दुष्ट दूसरा ईश्वर हो रहा है॥ ११९॥