भारतकोश
सौन्दर्य-निखार (स्वदेशी चिकित्सा)

सौन्दर्य-निखार (स्वदेशी चिकित्सा)

Saundarya Nikhar (Swadeshi Chikitsa)

राजीव दीक्षित द्वारा

स्रोत: Azadi Bachao Andolan First Edition · Azadi Bachao Andolan · 2010 (उद्गम)

DevanagariHindipublished80 पृष्ठ

पृष्ठ 38, कुल 80 में से

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गम्भारी की छाल 800 ग्राम तथा गम्भारी की छाल की लुगदी 200 ग्राम को सवा लीटर पानी में इतना उबालें कि चौथाई अंश शेष रह जाए। अब इसमें 800 मि.ली. तिल का तेल डालकर धीमी आँच पर पकाएं। जब सिर्फ तेल बच रहे तो उतार लें। इसी प्रकार से तीन बार गम्भारी छाल व कल्क(लुगदी) के साथ इस तेल को पकाएं। तीसरी बार में पकाने के बाद गर्म तेल में 15 ग्राम मोम डालकर उतारकर ठण्डा होने दें। कुछ ठण्डा होने के बाद तेल छानकर सुरक्षित रख लें।

इस तेल की प्रयोगविधि यह है कि इसमें कपड़े की पट्टी भिगोकर निचोड़ लें तथा स्तनों के ऊपर रखकर पान के पत्ते से ढँककर बाँध दें। प्रतिदिन सोते समय रात में यह प्रयोग करें। इससे धीरे-धीरे स्तन पुष्ट, सुडौल होने लगेंगे। यह 'श्रीपर्णी तेल' के नाम से बाज़ार में भी बिकता है।

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'चेहरे का सौन्दर्य' प्रकरण में वर्णित ताँबे के बरतन में नीबू का रस, तुलसी और कसांदी से बनने वाला नुस्खा प्रयोग करने से स्तन उन्नत, पुष्ट और सुडौल होते हैं।

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