भारतकोश
सौन्दर्य-निखार (स्वदेशी चिकित्सा)

सौन्दर्य-निखार (स्वदेशी चिकित्सा)

Saundarya Nikhar (Swadeshi Chikitsa)

राजीव दीक्षित द्वारा

स्रोत: Azadi Bachao Andolan First Edition · Azadi Bachao Andolan · 2010 (उद्गम)

DevanagariHindipublished80 पृष्ठ

पृष्ठ 4, कुल 80 में से

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प्रथम खण्ड

सौन्दर्य चाहिए तो स्वास्थ्य बचाइए

सौन्दर्य प्रसाधनों के दिन-दूने रात-चौगुने बढ़ते बाजार को देखकर यह अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि लोग सुन्दरता के लिए कितने परेशान हैं। स्त्री-पुरुष यहाँ तक कि नई पीढ़ी के बच्चे तक सुन्दर दिखने के लिए मेकअप के नए-नए तरीके आजमाने में लगे हैं। सुन्दरता के प्रति इतनी जागरूकता शायद पहले कभी नहीं रही। यदि इतनी ही जागरूकता समूचे स्वास्थ्य को लेकर लोगों में होती तो चिन्ता की विशेष बात नहीं थी। लेकिन दुर्भाग्य से लोग स्वास्थ्य के प्रति पूरी मनमानी करते हुए भी कृत्रिम प्रसाधनों के सहारे अपना सौन्दर्य निखारना चाहते हैं। अब कौन समझाए कि हँसना और गाल फुलाना, दोनों एक साथ नहीं हो सकते। अगर कुछ लोग यह सोचते हों कि वे स्वास्थ्य के प्रति पूरे लापरवाह रहकर भी अपने सौन्दर्य की हिफाज़त कर लेंगे तो वे निरा भ्रम के ही शिकार हैं। बाज़ारू सौन्दर्य प्रसाधनों का नकली आवरण असलियत को कितनी देर छुपाएगा? वास्तव में सच्चे सौन्दर्य का रहस्य तो अच्छे स्वास्थ्य में ही छुपा है। स्वास्थ्य निखरेगा तो सौन्दर्य में अपने आप निखार आ जाएगा, यह तय है।

कहने का सीधा सा अर्थ यह है कि अगर सौन्दर्य चाहिए तो स्वास्थ्य को सही-सलामत रखने का इन्तज़ाम भी अनिवार्यतः करना ही पड़ेगा। अब सवाल यह हो सकता है कि स्वास्थ्य ठीक रखने के लिए किया क्या जाए? तो इसका सीधा सा उत्तर है कि दिनचर्या सुधार ली जाए, तो बहुत कुछ ठीक हो जाएगा। दिनचर्या में आहार, निद्रा और व्यायाम पर ध्यान देना सबसे महत्वपूर्ण बातें हैं। आहार के विषय में आयुर्वेद का प्राचीन आदर्श है—हितभुक् मितभुक् ऋतभुक्। भाव यह है कि भोजन शरीर की अवस्था के अनुकूल हितकारी, उचित मात्रा में और प्रकृति सम्मत होना चाहिए। जिन्हें अपने सौन्दर्य-रक्षा की चिन्ता है उन्हें शुद्ध सात्विक शाकाहार अपनाना चाहिए। दाल, चावल, गेहूँ, जौ, बाजरा आदि विविध अन्नों के साथ हरी साग-सब्जी, फल व सलाद की समुचित मात्रा अच्छे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। यह ज़रूरी नहीं है कि स्वास्थ्य सुधारने के लिए आप मँहंगे फल-मेवे की तरफ़ ही भागें। मौसम के अनुसार मिलने वाले ढेरों सस्ते फल, सब्जियाँ आदि हैं जिनका उपयोग अपनी शारीरिक प्रकृति को देखते हुए किया जाय तो स्वास्थ्य-रक्षा का काम बखूबी हो सकता है।

आहार के विषय में यह ध्यान देने वाली बात है कि वर्तमान में जो लोगों की दिन भर कुछ न कुछ खाते रहने की आदत बढ़ रही है, यह ग़लत है। इसके अलावा 'फ़ास्ट फूड' संस्कृति ने आहार के मामले में और भी ज़्यादा भ्रष्टाचार फैला दिया है। अगर अपने स्वास्थ्य व सौन्दर्य की हिफाज़त करनी है तो इन आदतों को भी सुधारना ही पड़ेगा। दिन भर में मुख्य भोजन सिर्फ़ दो बार करना ही सेहत की दृष्टि से उचित है। यदि दोपहर 12 बजे तथा शाम 8 बजे के आस-पास

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