सौन्दर्य-निखार (स्वदेशी चिकित्सा)
Saundarya Nikhar (Swadeshi Chikitsa)
राजीव दीक्षित द्वारा
स्रोत: Azadi Bachao Andolan First Edition · Azadi Bachao Andolan · 2010 (उद्गम)
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तो कम से कम एक माह के लिए गेहूँ की रोटी खाना एकदम बंद कर दें। इस दौरान जौ के आटे से बनी रोटी भोजन में लें या साबुत चने में जौ मिलाकर पिसवा लें। इस आटे की रोटी स्वादिष्ट भी लगेगी। 10 किलो चना हो तो दो किलो जौ मिलाएं तो अच्छा लाभ मिलेगा। दालों में छिलकायुक्त मूँग, मसूर का सेवन बेहतर रहेगा।
चिकित्सा के शुरू में यदि एकाध हफ्ते तक सिर्फ मौसमी फल, फलों के रस, सलाद और हरी सब्जियों व दाल पर ही निर्वाह करें तो अच्छा है। इसके बाद धीरे-धीरे जौ की रोटी सेवन करना शुरू करें। एक डेढ़ माह बाद गेहूँ की रोटी खाना शुरू कर सकते हैं। दोनों समय का भोजन इसी तरह का करें। शाम को सोने से दो-तीन घण्टे पूर्व भोजन कर लेना हितकर है। कब्जियत दूर करने के लिए एनिमा ले सकते हैं या सोने से पूर्व एक गिलास गुनगुने पानी के साथ एक चम्मच त्रिफला में दो चम्मच ईसबगोल मिलाकर सेवन करें। त्रिफला के स्थान पर आँवले का चूर्ण भी ले सकते हैं। वैसे भी भोजन आदि के साथ ताज़ा या सूखे आँवले का चूर्ण, जो भी मिले, अवश्य सेवन करें।
दोपहर के भोजन के साथ मलाई रहित दूध से जमाई दही या छाछ भी ले सकते हैं। इससे मोटापा घटाने में मदद मिलेगी। भोजन में यह पूरा सुधार अपनाते हुए इतना याद रखें कि शुरू में एक हफ्ते तक फल-सब्जियों पर निर्वाह करने के बाद अचानक ही ढेर सारी रोटियाँ न खाना शुरू कर दें। एक-दो रोटी से शुरू करके धीरे-धीरे रोटियों की संख्या यथोचित मात्रा तक बढ़ाएं।
मोटापा, खासतौर से पेट और कमर का, घटाने के लिए एक अच्छा प्रयोग यह है कि दोनों समय भोजन करने के तुरंत बाद आधा गिलास उबला हुआ गर्म पानी चाय की तरह जितना गर्म पी सकें पी जाएं। यह प्रयोग डेढ़-दो माह तक कर सकते हैं। इसे बहुत लंबे समय तक नहीं चलाना चाहिए। यह प्रयोग प्रसव के बाद महिलाओं के पेट बढ़ने की समस्या में विशेष लाभप्रद है। गठिया, कृब्ज, गैस, यकृत रोग, मासिक धर्म की अनियमितता, आँखों के नीचे के कालेपन आदि में भी गर्म पानी का प्रयोग काफी हितकर है।
5. दोपहर और शाम के भोजन में 8-9 घण्टे का अंतराल हो तो बीच में 3 या 4 बजे तक कोई हल्का पेय या फल लें। थोड़े भुने चनों के साथ आयुर्वेदिक चाय लेकर भी काम चला सकते हैं।
इतने उपायों पर अमल करते हुए आप कुछ दिनों में मोटापे की समस्या पर तो विजय पा ही जाएंगे, आपके पोर-पोर में स्फूर्ति का भी संचार होगा। इन उपायों के साथ चाहें तो बायोकैमी की कल्केरिया फास 3g या 6g, काली फास 3g, काली म्यूर 6g, नेट्रम म्यूर 3g तथा साइलीशिया 12g नामक दवाओं की एक-एक टिकिया मिलाकर एक घूँट गरम पानी के साथ दिन में तीन-चार बार जब तक मोटापा न कम हो जाए तब तक सेवन कर सकते हैं। याद रखें कि बायोकैमिक दवा की टिकिया निगलने के बजाय जीभ पर रखकर चूसनी होती है। यह उपाय सोने पर सुहागा का काम करेगा। इसके अलावा चरित्रगत विशेषताओं के आधार पर चुनी गई कई होम्योपैथी औषधियाँ भी मोटापा घटाने में अच्छा प्रभाव दिखा सकती हैं।
मोटापा घटाने में सहायक कुछ अन्य नुस्खे
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