सौन्दर्य-निखार (स्वदेशी चिकित्सा)
Saundarya Nikhar (Swadeshi Chikitsa)
राजीव दीक्षित द्वारा
स्रोत: Azadi Bachao Andolan First Edition · Azadi Bachao Andolan · 2010 (उद्गम)
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ब्यूटी पार्लरों की दिन-दूनी रात चौगुनी बढ़ती तादाद को देखते हुए इनके भी नुकसानदेह पक्ष पर एक नजर डालना जरूरी है। ब्यूटी पार्लरों के सौन्दर्य प्रसाधनों में प्रमुख रूप से अमोनिया, हाइड्रोजन-पर-आक्साइड, चर्बी, एसीटोन वैक्सीन, वैसलीन, ज़िंक, स्पिरिट, अल्कोहल, ग्रीस जैसे पदार्थ प्रयोग किये जाते हैं। वास्तव में ये सभी चीज़ें त्वचा को किसी न किसी प्रकार से हानि पहुँचाती हैं। त्वचा में निखार लाने के लिए ब्लैचिंग की जो प्रक्रिया अपनाई जाती है, उसमें अमोनिया का इस्तेमाल होता है और यह त्वचा को जलाकर कड़ी कर देता है। बालों को काला करने के लिए ब्यूटी पार्लरों में हाइड्रोजन पर-आक्साइड और आर्गनिक हाइड्रोकार्बन जैसे रसायन प्रयोग किए जाते हैं। ये इतने नुकसानदेह होते हैं कि बालों का झड़ना और पकना दोनों ही तेज़ हो जाते हैं। हेअर स्प्रे जैसे साधनों से भी सिर में जलन और सूजन की समस्या पैदा हो सकती है।
कृत्रिम सौन्दर्य प्रसाधनों के इतने सारे नुकसानों को जानने के बाद भी अगर लोग इनके अंधाधुंध इस्तेमाल से बाज़ न आएँ और ब्यूटी पार्लरों के चक्कर लगाएँ तो इसे एक तरह के पागलपन के अलावा और क्या कहा जा सकता है? वास्तव में कृत्रिम सौन्दर्य प्रसाधनों के पीछे भागने के बजाय नींबू, खीरा, नीम, तुलसी, बेसन, गुलाबजल, चन्दन, चिरौंजी, दूध, हल्दी, दही, बादाम आदि ढेरों प्राकृतिक चीज़ों के सहारे सौन्दर्य को ज्यादा बेहतर तरीके से निखारा जा सकता है। यह भी मज़े की बात है कि जो फिल्मी अभिनेत्रियाँ कृत्रिम सौन्दर्य प्रसाधनों का दिन-रात विज्ञापन करती नज़र आती हैं वे खुद निजी तौर पर इनसे दूर ही रहती हैं। पत्रिकाओं-अख़बारों में प्रकाशित होने वाले अभिनेत्रियों के व्यक्तिगत साक्षात्कारों से इस तथ्य का खुलासा होता है कि वे अपना रूप और लावण्य बनाये रखने के लिए प्राकृतिक-आयुर्वेदिक उपायों को ही प्राथमिकता देती हैं। ऐसे में देश की नारियों को विशेष रूप से चाहिए कि वे विज्ञापनी मायाजाल से बाहर आएँ और कृत्रिमता से दूर हटकर प्राकृतिक सौन्दर्य प्रसाधनों को अपनाएँ। इस तरह से यदि देश की स्त्रियाँ ऐसा करने लगेँ तो वे अपने स्वास्थ्य और अपनी संस्कृति दोनों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
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