भारतकोश
सेहत संजीवनी

सेहत संजीवनी

Sehat Sanjivani

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: June 2009 First Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Post-Raya, Distt.-Samba (J & K) · 2009 (उद्गम)

DevanagariHindipublished104 पृष्ठ

पृष्ठ 17, कुल 104 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 17

सेहत संजीवनी

17

पित्तोदर की दवा

  • □ त्रिफला और निसोथ का काढ़ा बनाकर उसमें घी डालकर पीएँ।

वातोदर की दवा

  • □ पीपल, जवाखार, बच, हींग, नमक, सेंधा नमक, काला नमक, जीरा, कूट, अजवाइन, चीता, अदरक, सजीखार, मिर्च, जायफल, चाव-सबको कूटपीसकर चूर्ण बना लें। यह चूर्ण गर्म पानी के साथ खाएँ।

( आमवात, भगंदर... )

  • □ 500 ग्राम गूगुल, 800 ग्राम त्रिफला, 225 ग्राम गिलोय-सबको तीन गुने पानी में डालकर आग पर रखें। जब तीसरा हिस्सा रह जाए तो उतारकर छान लें। बाद में त्रिफला, तज, दाल्यून, निसोथ, बायबिडंग, गिलोय, कूट-सब डेढ़ किलो लेकर चूर्ण कर लें और ऊपर की दवा में डाल दें। काढ़ा तैयार कर लें। 12 ग्राम इस दवा का सेवन करें।
  • □ आमवात को दूर करता है।
  • □ परमा को दूर करता है।
  • □ भगंदर रोग को शांत करता है।

संग्रहणी रोग की दवा

  • □ सिंगरफ और सोहागा-दोनों बराबर मात्रा में लेकर कूटपीसकर छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। यदि दिन के समय दस्त हों तो नीबू के साथ खाएँ और यदि रात के समय हों तो शहद के साथ खाएँ।