सेहत संजीवनी

सेहत संजीवनी
Sehat Sanjivani
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: June 2009 First Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Post-Raya, Distt.-Samba (J & K) · 2009 (उद्गम)
DevanagariHindipublished104 पृष्ठ
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सेहत संजीवनी
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अनार का शरबत ( जलन... )
- □ 12 ग्राम अनार के दाने, 2 ग्राम मिर्च दोनों को पीसकर एक पाव पानी में मिलाकर पीएँ।
- □ छाती की जलन को दूर करता है।
- □ पित्तचर का भी नाश करता है।
ब्रह्माण्डी का शरबत ( बुद्धि... )
- □ 1 पाव बच, आधा किलो ब्रह्माण्डी, आधा किलो शंखाहोली को तीन किलो पानी में डालकर आग पर रखें। जब तीसरा हिस्सा रह जाए तो उतारकर छान लें और किसी बर्तन में डाल दें। फिर उसमें डेढ़ किलो मिश्री और 125 ग्राम घी मिलाकर चासनी बना लें। यह शरबत तैयार हो गया।
- □ उन्माद, अपस्मार आदि को समाप्त करता है।
- □ कलेजे को ठंडक पहुँचाता है और बुद्धि को बल प्रदान करता है।
गुलखुल का शरबत ( प्रमेह... )
- □ 20 ग्राम गुलखुल का पंचांग, 5 ग्राम मिश्री, 1 ग्राम मिर्च-सबको आधा किलो पानी में शाम के समय भिगो दें। सुबह छानकर पीएँ।
- □ सर्व प्रकार के प्रमेह को दूर करता है।
- □ भूख को भी खोलता है।
ककड़ी का शरबत ( मूर्छा... )
- □ 12 ग्राम ककरी के बीज, 12 ग्राम पीपल, 12 ग्राम तरबूज के बीज-सबको कूटपीसकर आधा किलो पानी में डालकर छान लें।