भारतकोश
सेहत संजीवनी

सेहत संजीवनी

Sehat Sanjivani

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: June 2009 First Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Post-Raya, Distt.-Samba (J & K) · 2009 (उद्गम)

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सेहत संजीवनी

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  • □ मूत्र बार-बार होता है।
  • □ यदि लाल, पीला, गर्म मूत्र पीड़ा सहित आए तो पित्त-मूत्रकृच्छ होता है।
  • □ यदि मूत्र में झाग आए, लिंग और पेडू भारी लगेँ, मूत्र त्याग में पीड़ा हो तो कफ-मूत्रकृच्छ होता है।

उपदंश के लक्षण

  • □ मुख काला पड़ जाता है।
  • □ पेशाब में कड़क होती है।
  • □ भूख नहीं लगती है।
  • □ ज्वर होता है।

श्वास रोग के लक्षण

  • □ मल-मूत्र ठीक से नहीं होता है।
  • □ रोगी लंबे-लंबे श्वास लेता है, जिसका स्वर दूर तक सुनाई देता है।
  • □ अपफारा होता है।

कफोदर के लक्षण

  • □ नींद बहुत आती है।
  • □ भोजन का दिल नहीं करता।
  • □ शरीर ठंडा और भारी रहता है।
  • □ पीड़ा का अनुभव होता है।
  • □ पेट आवाज करता है।