भारतकोश
शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

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२६ [ प्रथम पटल अनेन क्रमयोगेन गुणिता शिववल्लभा । षट् त्रिंशतं च तत्त्वानां (नि) शैवानां (न) रचयत्यहौ ॥१०६ अन्यान्मन्त्रांश्च यन्त्राणि शुभदानि प्रसूयते । द्विचत्वारिंशता मूले गुणिता विश्वनायिका ॥११० लक्ष्मीका भद्रकाली मन्त्र, यमात्मकमाया मन्त्र, देवकीसूनुका मन्त्र, श्री पुरुषोत्तम मन्त्र, श्री गोपाय का मन्त्र, भूमि का मन्त्र और क्रम से तारा का मन्त्र, महालक्ष्मी का महामन्त्र और भूतेश्वर के मन्त्र को वह प्रसूत करती है । क्षेत्रपाल के स्वरूप वाला मन्त्र और आपदाओं के निवारक मन्त्र को वह प्रसव किया करती है । वह मातङ्गिनी विद्याको तथा शुभोदय वाली सिद्ध विद्या को प्रसूत करती है ।१०६-१०८। इस क्रम से गुणों के योगसे शिववल्लभा गुणित होती है और यह शैव चौबीस तत्त्वों की रचना किया करती है ।१०६। मूल में बयालीस से गुणिता विश्वनायिका अन्य मन्त्रों को और शुभ पद मन्त्रों को प्रसूत किया करती है ।११०। सा प्रसूते कुण्डलिनी शब्दब्रह्ममयी विभ । शक्तिं ततो ध्वनिस्तस्मात् नादस्तस्मान्निरोधिका ॥१११ ततोऽर्द्धेन्दुस्ततो विन्दुस्तस्मादामीतत्परा ततः । पश्यन्ती मध्यमा वाची वैखरी शब्दजन्मभूः ॥११२ इच्छाज्ञानक्रियात्माऽसौ तेजारूपा गुणात्मिका । क्रमेणानेन सृजति कुण्डली वर्णमालिकाम् ॥११३ अकारादिसकान्तां द्विचत्वारिंशदात्मिकाम् । पञ्चाशद्वारगुणिता पञ्चाशद्वर्णमालिकाम् ॥११४ सूते तद्वर्णतोऽभिन्ना कला रुद्रादिकान् क्रमात् । निरोधिका भवेद्वह्निरर्द्धेन्दुः स्यान्निशाकरः ॥११५ अर्कः स्यादुभयोर्योगे बिन्द्रात्मा तेजसां निधिः । जाता वर्णा यतो बिन्दोः शिवशक्तिभयादतः ।.११६