शतपथ ब्राह्मण (शुक्ल यजुर्वेद - प्रथम भाग)
Shatapatha Brahmana Part 1 - Shukla Yajurveda
महर्षि याज्ञवल्क्य / सायणभाष्य द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंकां० २, अ० ६, ब्रा० ३-४, कं० १३-१७ व १-६ शतपथब्राह्मण / ३२३ जो चातुर्मास्य को फिर शुरू करना चाहता है ॥१३॥ अब सिर मुंडाना। यह सूर्य तो सब ओर मुख किये रहता है। वह जो कुछ सूखता है उसे सूर्य ही तो पीता है। इसलिए यह (यजमान भी) (सिर मुंडाने से) सर्वतोमुख और अन्न पचाने- वाला हो जाता है ॥१४॥ यह अग्नि भी सर्वतोमुख है। क्योंकि जो कुछ अग्नि में जिधर से भी डाला जाय भस्म हो जाता है, इसलिए यह (यजमान) भी (सिर मुंडाने से) सर्वतोमुख और अन्न पचानेवाला हो जाता है ॥१५॥ यह पुरुष तो एक ही ओर मुख रखता है। परन्तु सिर जो मुंडाता है वह सर्वतोमुख हो जाता है। और जो इस रहस्य को समझकर सिर मुंडाता है वह दोनों (अग्नि और सूर्य) के समान अन्न पचानेवाला होता है। इसलिए उसको बिल्कुल सिर मुंडाना चाहिए ॥१६॥ इस विषय में आसुरि की राय थी कि 'चाहे सब लोम मुंडा लें, तो भी इससे और मुख से क्या सम्बन्ध ? वर्ष में तीन बार यज्ञ करने से ही सर्वतोमुख और अन्न पचानेवाला होता है। इसलिए सिर मुंडाने की कोई आवश्यकता नहीं ॥१७॥ अध्याय ६-ब्राह्मण ४ यह जो कहा गया है कि देवों ने साकमेध यज्ञ के द्वारा वृत्र को मारा और उस विजय को पा लिया जो उनको प्राप्त है, यह सभी चातुर्मास्य यज्ञों के द्वारा ऐसा हुआ कि देवों ने वृत्र को मारा और जो विजय उनको प्राप्त है वह सभी के द्वारा हुई है ॥१॥ उन्होंने कहा, 'किस राजा के द्वारा और किस नेता की सहायता से हम लड़ेंगे ?' अग्नि ने कहा- 'मुझ राजा और मुझ नेता की सहायता से।' अग्नि राजा और अग्नि नेता की सहायता से उन्होंने चारों महीनों को जीता, और ब्रह्म तथा तीन विद्याओं की सहायता से उन (महीनों) को घेरा ॥२॥ उन्होंने कहा- 'किस राजा और किस नेता की सहायता से हम लड़ेंगे ?' वरुण ने कहा- 'मुझ राजा और मुझ नेता की सहायता से।' उन्होंने वरुण राजा और वरुण नेता की सहायता से दूसरे चार महीनों को जीता, और ब्रह्म तथा तीन विद्याओं की सहायता से उनको घेरा ॥३॥ उन्होंने कहा- 'किस राजा और किस नेता की सहायता से हम लड़ेंगे ?' इन्द्र ने कहा- 'मुझ राजा और मुझ नेता की सहायता से।' इन्द्र राजा और इन्द्र नेता की सहायता से उन्होंने शेष चार महीनों को जीता, और उनको ब्रह्म तथा तीन विद्याओं की सहायता से घेरा ॥४॥ जब वह वैश्वदेव यज्ञ करता है तो इसी अग्नि राजा और अग्नि नेता की सहायता से चारों महीनों को जीतता है। (सिर मुंडाने के लिए) त्र्येनी शलली (साही का कांटा जिसमें तीन धब्बे हों) और तांबे का क्षुरा होता है। त्र्येनी शलली तीन विद्याओं का रूप है और क्षुरा ब्रह्म का रूप है। अग्नि ब्रह्म है, अग्नि लाल है इसलिए तांबे का क्षुरा होता है। उससे चारों ओर मुंडवाता है। इस प्रकार वह (अध्वर्यु को) ब्रह्म और तीन विद्याओं से घेरता है ॥५॥ जब वह वरुण-प्रघास यज्ञ करता है तो वरुण राजा और वरुण नेता के द्वारा दूसरे चार