भारतकोश
शतपथ ब्राह्मण (शुक्ल यजुर्वेद - प्रथम भाग)

शतपथ ब्राह्मण (शुक्ल यजुर्वेद - प्रथम भाग)

Shatapatha Brahmana Part 1 - Shukla Yajurveda

महर्षि याज्ञवल्क्य / सायणभाष्य द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished699 पृष्ठ

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माध्यन्दिन शतपथ

काण्डकाण्ड का नामप्रारम्भ के शब्दअध्यायप्रपाठकब्राह्मणकण्डिका
हविर्यज्ञम्व्रतमुपैष्य०३७८३७
एकपादिकास यद्वा ऽ इत०२४५४६
अध्वरम्देवयजनं०३७८५६
ग्रहनामप्राणो ह वा०३६६४८
सवम्देवाश्च वा०२५४७१
उषासम्भररणम्असद् वा ऽ इदम०२७५३०
हस्तिघट्गार्हपत्यं चेष्यन्१२३६८
चितिःप्राणभृत उपदधाति२७४३७
संचितिःअथातः शतरुद्रियम्१५४०२
१०अग्निरहस्यम्अग्निरेष०३१३६६
११अष्टाध्यायीसंवत्सरो वै यज्ञः४२४३७
१२मध्यमम्<br>(सौत्रामणी)अयं वै यज्ञो०२६४५६
१३अश्वमेधम्ब्रह्मोदनं पचति४३४३२
१४बृहदारण्यकम्देवा ह वै०५०७६६
योग१००६८४३८७६२४
इसी ब्राह्मण की एक काण्वशाखा का भी उल्लेख हैं, जिसमें १७ काण्ड हैं। इनके
विवरण की तालिका इस प्रकार है—

काण्व शाखा

काण्डकाण्ड का नामप्रारम्भ के शब्दअध्यायब्राह्मणकण्डिका
एकपात् काण्डम्स वै सम्भारा०२२३७६
हविर्यज्ञ काण्डम्सं वै व्रतमुपै०३२५३२
उद्धारि काण्डम्२२१२४
अध्वरम्तद् वै देवयजन०३६६४६
ग्रहनामप्राणो ह वा०३८६७४
वाजपेय काण्डम्देवाश्च ह७००
राजसूय काण्डम्स वै पूर्णाहुति१६२८६
उषासम्हरणम्असद् वा ऽ इद०२७५११
हस्तिघट काण्डम्अथातो नैऋती०१६२५७
१०चितिप्राणभृत उप०२०२४३
११साग्निचितिनाकसद उप०२०४३७
१२अग्निरहस्यम्अग्निरेष०२८२८६
१३अष्टाध्यायी३१२४१
१४मध्यमम्अयं वै यज्ञो२८३६२
१५अश्वमेध काण्डम्ब्रह्मोदनं०४४३०८
१६प्रवर्ग्य काण्डम्अथास्मं श्मशा०१६२
१७बृहदारण्यकम्उषा वा ऽ अश्व०४७२६५
योग१०४४४५६७७६