शतपथ ब्राह्मण (शुक्ल यजुर्वेद - प्रथम भाग)

शतपथ ब्राह्मण (शुक्ल यजुर्वेद - प्रथम भाग)
Shatapatha Brahmana Part 1 - Shukla Yajurveda
महर्षि याज्ञवल्क्य / सायणभाष्य द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान · 1950 (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished699 पृष्ठ
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(७)
माध्यन्दिन शतपथ
| काण्ड | काण्ड का नाम | प्रारम्भ के शब्द | अध्याय | प्रपाठक | ब्राह्मण | कण्डिका |
|---|---|---|---|---|---|---|
| १ | हविर्यज्ञम् | व्रतमुपैष्य० | ६ | ७ | ३७ | ८३७ |
| २ | एकपादिका | स यद्वा ऽ इत० | ६ | ५ | २४ | ५४६ |
| ३ | अध्वरम् | देवयजनं० | ६ | ७ | ३७ | ८५६ |
| ४ | ग्रहनाम | प्राणो ह वा० | ६ | ५ | ३६ | ६४८ |
| ५ | सवम् | देवाश्च वा० | ५ | ४ | २५ | ४७१ |
| ६ | उषासम्भररणम् | असद् वा ऽ इदम० | ८ | ५ | २७ | ५३० |
| ७ | हस्तिघट् | गार्हपत्यं चेष्यन् | ५ | ४ | १२ | ३६८ |
| ८ | चितिः | प्राणभृत उपदधाति | ७ | ४ | २७ | ४३७ |
| ९ | संचितिः | अथातः शतरुद्रियम् | ५ | ४ | १५ | ४०२ |
| १० | अग्निरहस्यम् | अग्निरेष० | ६ | ४ | ३१ | ३६६ |
| ११ | अष्टाध्यायी | संवत्सरो वै यज्ञः | ८ | ४ | ४२ | ४३७ |
| १२ | मध्यमम्<br>(सौत्रामणी) | अयं वै यज्ञो० | ६ | ४ | २६ | ४५६ |
| १३ | अश्वमेधम् | ब्रह्मोदनं पचति | ८ | ४ | ४३ | ४३२ |
| १४ | बृहदारण्यकम् | देवा ह वै० | ६ | ७ | ५० | ७६६ |
| योग | १०० | ६८ | ४३८ | ७६२४ | ||
| इसी ब्राह्मण की एक काण्वशाखा का भी उल्लेख हैं, जिसमें १७ काण्ड हैं। इनके | ||||||
| विवरण की तालिका इस प्रकार है— |
काण्व शाखा
| काण्ड | काण्ड का नाम | प्रारम्भ के शब्द | अध्याय | ब्राह्मण | कण्डिका |
|---|---|---|---|---|---|
| १ | एकपात् काण्डम् | स वै सम्भारा० | ६ | २२ | ३७६ |
| २ | हविर्यज्ञ काण्डम् | सं वै व्रतमुपै० | ८ | ३२ | ५३२ |
| ३ | उद्धारि काण्डम् | २ | २२ | १२४ | |
| ४ | अध्वरम् | तद् वै देवयजन० | ६ | ३६ | ६४६ |
| ५ | ग्रहनाम | प्राणो ह वा० | ८ | ३८ | ६७४ |
| ६ | वाजपेय काण्डम् | देवाश्च ह | २ | ७ | ७०० |
| ७ | राजसूय काण्डम् | स वै पूर्णाहुति | ५ | १६ | २८६ |
| ८ | उषासम्हरणम् | असद् वा ऽ इद० | ८ | २७ | ५११ |
| ९ | हस्तिघट काण्डम् | अथातो नैऋती० | ५ | १६ | २५७ |
| १० | चिति | प्राणभृत उप० | ५ | २० | २४३ |
| ११ | साग्निचिति | नाकसद उप० | ७ | २० | ४३७ |
| १२ | अग्निरहस्यम् | अग्निरेष० | ६ | २८ | २८६ |
| १३ | अष्टाध्यायी | — | ८ | ३१ | २४१ |
| १४ | मध्यमम् | अयं वै यज्ञो | ६ | २८ | ३६२ |
| १५ | अश्वमेध काण्डम् | ब्रह्मोदनं० | ८ | ४४ | ३०८ |
| १६ | प्रवर्ग्य काण्डम् | अथास्मं श्मशा० | २ | ८ | १६२ |
| १७ | बृहदारण्यकम् | उषा वा ऽ अश्व० | ६ | ४७ | २६५ |
| योग | १०४ | ४४५ | ६७७६ |