शिव गीता (पद्म पुराण - राम-शिव ज्ञान संवाद सटीक)
Shiva Gita from Padma Purana with Hindi Commentary
भगवान् शिव / महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसब ब्रह्मरुपही है, फिर विषयादिक मे कौनसी वस्तु त्यागनेके योग्य है, कारण कि (ईशावास्यमिदं सर्व यत्किंचज्जगत्यां जगदिति श्रुतिः ) यह सब कुछ ब्रह्मही है ॥३५॥ इति श्रीपद्मपुराणे उत्तरखण्डे शिवगीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे शिवराघवसंवादे पण्डितज्वालाप्रसादमिश्रकृत भाषाटीकायां जीवन्मुक्तिस्वरूपनिरूपणयोगो नामाष्टादशोऽध्यायः ॥१८॥ फाल्गुनकृष्ण त्रयोदशी, शशिदिन शंभु मनाये ॥ शिवगीताको तिलक यह, पूर्ण कियो मन लाय ॥१॥ उन्निससै पंचाश शुभ, सम्वत्सर सुखदान ॥ चंद्रमौलि शंकरसुमिर, भाष्यो गीताज्ञान ॥२॥ पढहिं सुनहिं आचरहिं जो, पावहिं पदनिर्वान ॥ भक्तिलहहिं शिवकी शुभद, नितनूतन कल्यान ॥३॥ हे शंकर यह आपके, अर्पण कियो बनाय ॥ करिये अंगीकार प्रभु, पुष्पांजलि गिरिशाय ॥४॥ नित ज्वालाप्रसाद पद, वन्दत वारंवार ॥ यह प्रसाद है आपको, करिये प्रभु निस्तार ॥५॥ ॥श्रीसांबसदाशिवार्पणमस्तु॥