शिवमहिम्नः स्तोत्रम् (गन्धर्वराज पुष्पदन्त - सानुवाद सटीक)
Shiva Mahimna Stotram with Hindi Commentary
गन्धर्वराज पुष्पदन्त / आचार्य राजेश दीक्षित द्वारा
पृष्ठ 20, कुल 35 में से
संदर्भ में पढ़ें१८ शिवमहिम्नस्तोत्रम् महादेवजी से श्रेष्ठ कोई देवता नहीं है, महिम्न से श्रेष्ठ कोई स्तोत्र नहीं है, अघोर मंत्र से श्रेष्ठ कोई मन्त्र नहीं है और गुरु से श्रेष्ठ कोई तत्त्व (पदार्थ) नहीं है ॥ ३५ ॥ दीक्षादानं तपस्तीर्थं ज्ञानं यागादिकाः क्रियाः । महिम्नरतव पाठस्य कलां नार्हन्ति षोडशीम् ॥३६॥ दीक्षा, दान, तप, तीर्थादि तथा ज्ञान और यागादि क्रियाएँ इस शिवमहिम्नस्तोत्र के पाठ की सोलहवीं कला को भी नहीं प्राप्त कर सकती हैं ॥ ३६ ॥ कुसुमदशननामा सर्वगन्धर्वराजः शशिधरवरमौलेर्देवदेवस्य दासः । स खलु निजमहिम्नो भ्रष्ट एवास्य रोषात्- स्तवनमिदमकार्षीद्दिव्यदिव्यं महिम्नः ॥३७॥ सभी गंधर्वो के राजा पुष्पदंत भाल में चन्द्रमा को धारण करने वाले देवाधि देव महादेवजी के दास थे, वे सुरगुरु महादेवजी के क्रोध से अपनी महिमा से भ्रष्ट हुए, तब उन्होंने शिवजी की प्रसन्नता के लिए इस परम दिव्य शिवमहिम्न स्तोत्र को बनाया ॥ ३७ ॥ सुरवरमुनिपूज्यं स्वर्गमोक्षैकहेतुम् पठति यदि मनुष्यः प्राञ्जलिर्नान्यचेताः ।