भारतकोश
शिवमहिम्नः स्तोत्रम् (गन्धर्वराज पुष्पदन्त - सानुवाद सटीक)

शिवमहिम्नः स्तोत्रम् (गन्धर्वराज पुष्पदन्त - सानुवाद सटीक)

Shiva Mahimna Stotram with Hindi Commentary

गन्धर्वराज पुष्पदन्त / आचार्य राजेश दीक्षित द्वारा

DevanagariSanskritpublished35 पृष्ठ

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भाषा-टीका-सहितम् २३ भुजंगराजमालया निबद्धजट जूटकः श्रियैचिराय जायतां चकोरबन्धुशेखरः ।५। जिनकी चरणपादुकाएँ इन्द्र आदि समस्त देवताओंके (प्रणाम करते समय) मस्तकवर्ती कुसुमों की धूलिसे धूसरित हो रही हैं, नागराज (शेष) के हार से बँधी हुई जटावाले वे भगवान चन्द्रशेखर मेरे लिए चिरस्थायिनी सम्पत्ति के साधक हों ॥ ५ ॥ ललाटचत्वरज्वलद्धनंजयस्फुलिंगभा- निपीतपंचसायकं नमन्निलिम्पनायकम् । सुधामयूखलेखया विराजमानशेखरं महाकपालि सम्पदे शिरो जटालमस्तु नः ।६। जिसने ललाट-वेदीपर प्रज्वलित हुई अग्नि के स्फुलिंगों के तेज से कामदेव को नष्ट कर डाला था, वह (श्रीमहादेवजीका) उन्नत विशाल ललाटवाला जटिल मस्तक हमारी सम्पत्ति का साधक हो ॥ ६ ॥ करालभालपट्टिकाधगद्धगद्धगज्ज्वल- द्वनंजयाहुतीकृतप्रचण्डपंचसायके । धराधरेन्द्रनन्दिनीकुचाग्रचित्रपत्रक- प्रकल्प नैकशिल्पिनि त्रिलोचने रतिर्मम ।७। जिन्होंने अपने विकराल भालपट्ट पर धक्-धक् जलती हुई अग्नि में प्रचण्ड कामदेव को हवन कर दिया था, गिरिराज-