शिव पुराण
Shiva Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१५० * संक्षिप्त शिवपुराण *
आज्ञासे मानवरूप धारण करके साधकोंकी प्रेरणासे साधनमें लग गये। इसके बाद मैंने अपने विभिन्न अंगोंसे देवता, असुर आदिके रूपमें असंख्य पुत्रोंकी सृष्टि करके उन्हें भिन्न-भिन्न शरीर प्रदान किये। मुने ! तदनन्तर अन्तर्यामी भगवान् शंकरकी प्रेरणासे अपने शरीरको दो भागोंमें विभक्त करके मैं दो रूपवाला हो गया। नारद! आधे शरीरसे मैं स्त्री हो गया और आधेसे पुरुष। उस पुरुषने उस स्त्रीके गर्भसे सर्वसाधनसमर्थ उत्तम जोड़ेको उत्पन्न किया। उस जोड़ेमें जो पुरुष था, वही स्वायम्भुव मनुके नामसे प्रसिद्ध हुआ। स्वायम्भुव मनु उच्चकोटिके साधक हुए तथा जो स्त्री हुई, वह शतरूपा कहलायी। वह योगिनी एवं तपस्विनी हुई। तात! मनुने वैवाहिक विधिसे अत्यन्त सुन्दरी शतरूपाका पाणिग्रहण किया और उससे वे मैथुनजनित सृष्टि उत्पन्न करने लगे। उन्होंने शतरूपासे प्रियव्रत और उत्तानपाद नामक दो पुत्र और तीन कन्याएँ उत्पन्न कीं। कन्याओंके नाम थे—आकूति, देवहूति और प्रसूति। मनुने आकूतिका विवाह प्रजापति रुचिके साथ किया। मझली पुत्री देवहूति कर्दमको ब्याह दी और उत्तानपादकी सबसे छोटी बहिन प्रसूति प्रजापति दक्षको दे दी। उनकी संतान-परम्पराओंसे समस्त चराचर जगत् व्याप्त है।
रुचिसे आकूतिके गर्भसे यज्ञ और दक्षिणा नामक स्त्री-पुरुषका जोड़ा उत्पन्न हुआ। यज्ञके दक्षिणासे बारह पुत्र हुए। मुने! कर्दमद्वारा देवहूतिके गर्भसे बहुत-सी पुत्रियाँ उत्पन्न हुईं। दक्षके प्रसूतिसे चौबीस कन्याएँ हुईं। उनमेंसे श्रद्धा आदि तेरह कन्याओंका विवाह दक्षने धर्मके साथ कर दिया। मुनीश्वर! धर्मकी उन पत्नियोंके नाम सुनो—श्रद्धा, लक्ष्मी, धृति, तुष्टि, पुष्टि, मेधा, क्रिया, बुद्धि, लज्जा, वसु, शान्ति, सिद्धि और कीर्ति—ये सब तेरह हैं। इनसे छोटी जो शेष ग्यारह सुलोचना कन्याएँ थीं, उनके नाम इस प्रकार हैं—ख्याति, सती, सम्भूति, स्मृति, प्रीति, क्षमा, संनति, अनसूया, ऊर्जा, स्वाहा तथा स्वधा। भृगु, शिव, मरीचि, अंगिरा मुनि, पुलस्त्य, पुलह, मुनिश्रेष्ठ क्रतु, अत्रि, वसिष्ठ, अग्नि और पितरोंने क्रमशः इन ख्याति आदि कन्याओंका पाणिग्रहण किया। भृगु आदि मुनिश्रेष्ठ साधक हैं। इनकी संतानोंसे चराचर प्राणियोंसहित सारी त्रिलोकी भरी हुई है।
इस प्रकार अम्बिकापति महादेवजीकी आज्ञासे अपने पूर्वकर्मोंके अनुसार बहुत-से प्राणी असंख्य श्रेष्ठ द्विजोंके रूपमें उत्पन्न हुए। कल्पभेदसे दक्षके साठ कन्याएँ बतायी