शिव पुराण
Shiva Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२४२ * संक्षिप्त शिवपुराण *
दक्षसे सम्मानित हो प्रीति और प्रसन्नताके साथ गणोंसहित अपने निवासस्थान कैलास पर्वतको चले गये। अपने पर्वतपर आकर शम्भुने अपनी प्रिया सतीका स्मरण किया और प्रधान-प्रधान गणोंसे उनकी कथा कही।
इस प्रकार दक्षकन्या सती यज्ञमें अपने शरीरको त्यागकर फिर हिमालयकी पत्नी मेनाके गर्भसे उत्पन्न हुईं, यह बात प्रसिद्ध है। फिर वहाँ तपस्या करके गौरी शिवाने भगवान् शिवका पतिरूपमें वरण किया। वे उनके वामांगमें स्थान पाकर अद्भुत लीलाएँ करने लगीं। नारद! इस तरह मैंने तुमसे सतीके परम अद्भुत दिव्य चरित्रका वर्णन किया है, जो भोग और मोक्षको देनेवाला तथा सम्पूर्ण कामनाओंको पूर्ण करनेवाला है। यह उपाख्यान पापको दूर करनेवाला, पवित्र एवं परम पावन है। स्वर्ग, यश तथा आयुको देनेवाला तथा पुत्र-पौत्ररूप फल प्रदान करनेवाला है। तात! जो भक्तिमान् पुरुष भक्तिभावसे लोगोंको यह कथा सुनाता है, वह इस लोकमें सम्पूर्ण कर्मोंका फल पाकर परलोकमें परमगतिको प्राप्त कर लेता है।
(अध्याय ४३)
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॥ रुद्रसंहिताका सतीखण्ड सम्पूर्ण ॥
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