भारतकोश
शिव पुराण

शिव पुराण

Shiva Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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३६८ * संक्षिप्त शिवपुराण *

हो गया। उनका नाम त्रिलोकीमें विख्यात हो गया। वह शुभदायक, सर्वपापहारी, पुण्यमय और उत्कृष्ट ब्रह्मचर्यकी शक्ति प्रदान करनेवाला है। कार्तिककी पूर्णिमाको सभी देवता, ऋषि, तीर्थ और मुनीश्वर सदा कुमारका दर्शन करनेके लिये (क्रौंच-पर्वतपर) जाते हैं। जो मनुष्य कार्तिकी पूर्णिमाके दिन कृत्तिका नक्षत्रका योग होनेपर स्वामिकार्तिकका दर्शन करता है, उसके सम्पूर्ण पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मनोवांछित फलकी प्राप्ति होती है। इधर स्कन्दका बिछोह हो जानेपर उमाको महान् दुःख हुआ। उन्होंने दीनभावसे अपने स्वामी शिवजीसे कहा—'प्रभो! आप मुझे साथ लेकर वहाँ चलिये।' तब प्रियाको सुख देनेके निमित्त स्वयं भगवान् शंकर अपने एक अंशसे उस पर्वतपर गये और सुखदायक मल्लिकार्जुन नामक ज्योतिर्लिंगके रूपमें वहाँ प्रतिष्ठित हो गये। वे सत्पुरुषोंकी गति तथा अपने सभी भक्तोंके मनोरथ पूर्ण करनेवाले हैं। वे आज भी शिवाके सहित उस पर्वतपर विराजमान हैं।

बेटा नारद! वे दोनों शिवा-शिव भी पुत्र-स्नेहसे विह्वल होकर प्रत्येक पर्वपर कुमारको देखनेके लिये जाते हैं। अमावास्याके दिन वहाँ स्वयं शम्भु पधारते हैं और पूर्णिमाके दिन पार्वतीजी जाती हैं। मुनीश्वर! तुमने स्वामिकार्तिक और गणेशका जो-जो वृत्तान्त मुझसे पूछा था, वह सब मैंने तुम्हें कह सुनाया। इसे सुनकर बुद्धिमान् मनुष्य समस्त पापोंसे मुक्त हो जाता है और उसकी सभी शुभ कामनाएँ पूर्ण हो जाती हैं। जो मनुष्य इस चरित्रको पढ़ता अथवा पढ़ाता है एवं सुनता अथवा सुनाता है, निस्संदेह उसके सभी मनोरथ सफल हो जाते हैं। यह अनुपम आख्यान पापनाशक, कीर्तिप्रद, सुखवर्धक, आयु बढ़ानेवाला, स्वर्गकी प्राप्ति करानेवाला, पुत्र-पौत्रकी वृद्धि करनेवाला, मोक्षप्रद, शिवजीके उत्तम ज्ञानका प्रदाता, शिव-पार्वतीमें प्रेम उत्पन्न करनेवाला और शिवभक्तिवर्धक है। यह कल्याणकारक, शिवजीके अद्वैत ज्ञानका दाता और सदा शिवमयी है; अतः मोक्षकामी एवं निष्काम भक्तोंको सदा इसका श्रवण करना चाहिये।

(अध्याय २०)

$$\sim\sim\circ\sim\sim$$ ॥ रुद्रसंहिताका कुमारखण्ड सम्पूर्ण ॥ $$\sim\sim\circ\sim\sim$$