भारतकोश
शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

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(१९६) शिवसंहिता भाषाटीकासमेता । टीका-हे देवि ! अब उत्तम मन्त्रसाधन हम कहते हैं जिससे इस लोक और परलोक दोनों स्थानमें साधक आनन्दपूर्वक सुख भोगेगा ॥ २३७ ॥ मूलम्-यस्मिन्मन्त्रे वरे ज्ञाते योगसिद्धिर्भ- वेत्खलु ॥ योगेन साधकेन्द्रस्य सर्वैश्वर्य- सुखप्रदा ॥ २३८ ॥ टीका-यह उत्तम मन्त्रके ज्ञान होनेसे निश्चय योग सिद्ध होता है साधकेन्द्रको यह योग सर्व ऐश्वर्य सुखका दाता है ॥ २३८ ॥ मूलम्-मूलाधारेस्ति यत्पद्मं चतुर्दलसम- न्वितम् ॥ तन्मध्ये वाग्भवं बीजं विस्फु- रन्तं तडित्प्रभम् ॥२३९॥ हृदये कामबी- जंतु बन्धूककुसुमप्रभम् ॥ आज्ञारविन्दे शक्त्याख्यं चन्द्रकोटिसमप्रभम्॥२४०॥ बीजत्रयमिदं गोप्यं भुक्तिमुक्तिफलप्र- दम् ॥ एतन्मन्त्रत्रयं योगी साधयेत्सि- द्धिसाधकः ॥ २४१ ॥ टीका-जो मूलाधार चतुर्दलसंयुक्त पद्म है उसमें विद्युतके समान प्रभायुक्त वाग्बीजकी स्थिति है और हृदयकमलमें बन्धूकपुष्पके समान प्रभायुक्त कामबी-

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