भारतकोश
शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

पृष्ठ 5, कुल 216 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 5

ओ३म् श्रीगणेशाय नमः। अथ शिवसंहिता। मंगलाचरणम्। विघ्नहरण गणनायजी, बुद्धिगेह तुअ माहिं ॥ विघ्न बुद्धि दोनों विकल, नशत जात जगमाहिं ॥ १ ॥ बुद्धिराज दीजे हमें, बुद्धि पुत्र गौरीश ॥ योगयुक्ति भाषा करौं, धरि गुरुआज्ञा शीश ॥ २ ॥ शिव आलयमें जायके, होत जीव भवपार ॥ पाय कृपा गुरु शम्भुकी, भंजन चहों कैवार ॥ ३ ॥ गौरी अब मोहिं दीजिए, अनुशासन सुत जानि ॥ शिवभाषित भाषा रचौं, छूटों भवभ्रम जानि ॥ ४ ॥ फिर नहिं आवों जगतमें, योग युक्ति सब जानि ॥ मातु कृपा मोपर करहु, शिक्षहुदेहुमोहिंज्ञान ॥ ५ ॥ नाम हमारोहै नहीं, नहीं कर्म गुण त्रास ॥ मातु पुकारत पै अहौं, रामचरणपुरि दास ॥ ६ ॥ श्लोक-यंज्ञातुमेवयतिनो मतिपूर्वमेतत् संसारसृत्वरकलत्रसुतादिसर्वम् ॥ त्यक्त्वासमाधिविधिमेवसमाश्रयन्ते वन्देकमप्यहमजंगदादिबीजम् ॥ १ ॥