शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)
Shiva Samhita with Hindi Commentary
भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा
पृष्ठ 75, कुल 216 में से
संदर्भ में पढ़ेंतृतीयपटलः । ( ७१ ) टीका-पूर्व्वार्जित कर्म और जो इस जन्ममें किया है यह दोनोंके फलको बुद्धिमान् साधक प्राणायामसे निश्चय है कि, नाश करदेता है ॥ ५८ ॥ मूलम्-पूर्व्वार्जितानि पापानि पुण्यानि विवि- धानि च ॥ नाशयेत्षोडशप्राणायामेन योगिपुंगवः ॥ ५९ ॥ टीका-श्रेष्ठयोगी पूर्व्वार्जित नानाप्रकारका पाप और पुण्य केवल सोलह प्राणायामसे नाश कर- देताहै ॥ ५९ ॥ मूलम्-पापतूलचयानाहोप्रलयेत्प्रलयाग्नि- ना ॥ ततः पापविनिर्मुक्तः पश्चात्पुण्या- नि नाशयेत् ॥ ६० ॥ टीका-साधक पाप राशिको तूलके समान प्राणा- यामरूपी अग्निसे प्रलय करदेताहै अर्थात् जलादेताहै. इसप्रकारसे मुक्तहोके पश्चात् पुण्यकोभी उसी अग्निमें नाश करदेताहै ॥ ६० ॥ मूलम्-प्राणायामेन योगीन्द्रो लब्ध्वैश्वर्या- ष्टकानि वै॥ पापपुण्योदधिं तीर्त्वा त्रैलो- क्यचरतामियात् ॥६१ ॥ ·टीका-योगी प्राणायामके प्रभावसे आठ ऐश्वर्य