श्रीरामचरितमानस

श्रीरामचरितमानस
Shri Ramcharitmanas
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
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॥ श्रीहरिः ॥
पारायण-विधि
श्रीरामचरितमानसका विधिपूर्वक पाठ करनेवाले महानुभावोंको पाठारम्भके पूर्व श्रीतुलसीदासजी, श्रीवाल्मीकिजी, श्रीशिवजी तथा श्रीहनुमान्जीका आवाहन, पूजन करनेके पश्चात् तीनों भाइयोंसहित श्रीसीतारामजीका आवाहन, घोडशोपचार पूजन और ध्यान करना चाहिये। तदनन्तर पाठका आरम्भ करना चाहिये। सबके आवाहन, पूजन और ध्यानके मन्त्र क्रमशः नीचे लिखे जाते हैं—
अथ आवाहनमन्त्रः
| तुलसीक | नमस्तुभ्यमिहागच्छ | शुचिब्रत। |
|---|---|---|
| नैरुह्य | उपविश्येदं | पूजनं प्रतिगृह्यताम् ॥ १ ॥ |
ॐ तुलसीदासाय नमः।
| श्रीवाल्मीक | नमस्तुभ्यमिहागच्छ | शुभप्रद। |
|---|---|---|
| उत्तरपूर्वयोर्यध्ये | तिष्ठ | गृहीष्व मेऽर्चनम् ॥ २ ॥ |
ॐ वाल्मीकाय नमः।
| गौरीपते | नमस्तुभ्यमिहागच्छ | महेश्वर। |
|---|---|---|
| पूर्वदक्षिणयोर्यध्ये | तिष्ठ | पूजां गृहाण मे ॥ ३ ॥ |
ॐ गौरीपतये नमः।
| श्रीलक्ष्मण | नमस्तुभ्यमिहागच्छ | सहप्रियः। |
|---|---|---|
| याम्यभागे | समातिष्ठ | पूजनं संगृहाण मे ॥ ४ ॥ |
ॐ श्रीसपत्नीकाय लक्ष्मणाय नमः।
| श्रीशत्रुघ्न | नमस्तुभ्यमिहागच्छ | सहप्रियः। |
|---|---|---|
| पीठस्य पश्चिमे | भागे | पूजनं स्वीकुरुष्व मे ॥ ५ ॥ |
ॐ श्रीसपत्नीकाय शत्रुघ्नाय नमः।
| श्रीभरत | नमस्तुभ्यमिहागच्छ | सहप्रियः। |
|---|---|---|
| पीठकस्योत्तरे | भागे | तिष्ठ पूजां गृहाण मे ॥ ६ ॥ |
ॐ श्रीसपत्नीकाय भरताय नमः।
| श्रीहनुमन्मस्तुभ्यमिहागच्छ | कृपानिधे। |
|---|---|
| पूर्वभागे | समातिष्ठ |
ॐ हनुमते नमः।