भारतकोश
श्रीरामचरितमानस

श्रीरामचरितमानस

Shri Ramcharitmanas

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

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पृष्ठ 287
  • बालकाण्ड *

२८५

दो०—तेहिं रथ रुचिर बसिष्ठ कहहुँ हरषि चढ़ाइ नरेसु।

आपु चढ़ेउ स्यंदन सुमिरि हर गुर गौरि गनेसु ॥ ३०१ ॥

उस सुन्दर रथपर राजा वसिष्ठजीको हर्षपूर्वक चढ़ाकर फिर स्वयं शिव, गुरु, गौरी (पार्वती) और गणेशजीका स्मरण करके [दूसरे] रथपर चढ़े ॥ ३०१ ॥

सहित बसिष्ठ सोह नृप कैसें । सुर गुर संग पुंरंदर जैसें ॥ करि कुल रीति बेद बिधि राऊ । देखि सबहि सब भाँति बनाऊ ॥

वसिष्ठजीके साथ [जाते हुए] राजा दशरथजी कैसे शोभित हो रहे हैं, जैसे देवगुरु बृहस्पतिजीके साथ इन्द्र हों। वेदकी विधिसे और कुलकी रीतिके अनुसार सब कार्य करके तथा सबको सब प्रकारसे सजे देखकर, ॥ १ ॥

सुमिरि रामु गुर आयसु पाई । चले महीपति संख बजाई ॥ हरषे बिबुध बिलोकि बराता । बरषहिं सुमन सुमंगल दाता ॥

श्रीरामचन्द्रजीका स्मरण करके, गुरुकी आज्ञा पाकर पृथ्वीपति दशरथजी शंख बजाकर चले। बारात देखकर देवता हर्षित हुए और सुन्दर मङ्गलदायक फूलोंकी वर्षा करने लगे ॥ २ ॥

भयउ कोलाहल हय गय गाजे । व्योम बरात बाजने बाजे ॥ सुर नर नारि सुमंगल गाई । सरस राग बाजहिं सहनाई ॥

बड़ा शोर मच गया, घोड़े और हाथी गरजने लगे। आकाशमें और बारातमें [दोनों जगह] बाजे बजने लगे। देवाङ्गनाएँ और मनुष्योंकी स्त्रियाँ सुन्दर मङ्गलगान करने लगीं और रसीले रागसे शहनाइयाँ बजने लगीं ॥ ३ ॥

घंट घंटि धुनि बरनि न जाहीं । सरव करहिं पाङ्क फहराहीं ॥ करहिं बिदूषक कौतुक नाना । हास कुसल कल गान सुजाना ॥

घंटे-घंटियोंकी ध्वनिका वर्णन नहीं हो सकता। पैदल चलनेवाले सेवकगण अथवा पट्टेबाज कसरतके खेल कर रहे हैं और फहरा रहे हैं (आकाशमें ऊँचे उछलते हुए जा रहे हैं)। हँसी करनेमें निपुण और सुन्दर गानेमें चतुर विदूषक (मसखरे) तरह-तरहके तमाशे कर रहे हैं ॥ ४ ॥

दो०—तुरग नचावहिं कुअर्र बर अकनि मृदंग निसान।

नागर नट चितवहिं चकित डगहिं न ताल बँधान ॥ ३०२ ॥

सुन्दर राजकुमार मृदङ्ग और नगाड़ेके शब्द सुनकर घोड़ोंको उन्हींके अनुसार इस प्रकार नचा रहे हैं कि वे तालके बंधानसे जरा भी डिगते नहीं हैं। चतुर नट चकित होकर यह देख रहे हैं ॥ ३०२ ॥