भारतकोश
श्रीरामचरितमानस

श्रीरामचरितमानस

Shri Ramcharitmanas

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished1,058 पृष्ठ

पृष्ठ 6, कुल 1058 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 6

[४]

तुलसीदासजी-जैसे अनन्य भगवद्भक्तके द्वारा, जिन्होंने भगवान् श्रीसीतारामजीकी कृपासे उनकी दिव्य लीलाओंका प्रत्यक्ष अनुभव करके यथार्थ रूपमें वर्णन किया है, साक्षात् भगवान् श्रीगौरीशंकरजीकी आज्ञासे हुई तथा जिसपर उन्हीं भगवान्ने 'सत्यं शिवं सुन्दरम्' लिखकर अपने हाथसे सही की, उसका इस प्रकारका अलौकिक प्रभाव कोई आश्चर्यकी बात नहीं है। ऐसी दशामें इस अलौकिक ग्रन्थका जितना भी प्रचार किया जायगा, जितना अधिक पठन-पाठन एवं मनन-अनुशीलन होगा, उतना ही जगत्का मङ्गल होगा—इसमें तनिक भी संदेह नहीं है। वर्तमान समयमें तो, जब सर्वत्र हाहाकार मचा हुआ है, सारा संसार दुःख एवं अशान्तिकी भीषण ज्वालासे जल रहा है, जगत्के कोने-कोनेमें मार-काट मची हुई है और प्रतिदिन हजारों मनुष्योंका संहार हो रहा है, करोड़ों-अरबोंकी सम्पत्ति एक-दूसरेके विनाशके लिये खर्च की जा रही है, विज्ञानकी सारी शक्ति पृथ्वीको श्मशानके रूपमें परिणत करनेमें लगी हुई है, संसारके बड़े-से-बड़े मस्तिष्क संहारके नये-नये साधनोंको दृढ़ निकालनेमें व्यस्त हैं, जगत्में सुख-शान्ति एवं प्रेमका प्रसार करने तथा भगवत्कृपाका जीवनमें अनुभव करनेके लिये रामचरितमानसका पाठ एवं अनुशीलन परम आवश्यक है।

इसी दृष्टिसे गीताकी भाँति मानसके भी कई छोटे-बड़े यथासाध्य शुद्ध, प्रामाणिक, सस्ते, सचित्र एवं सटीक संस्करण निकालनेका आयोजन गीताप्रेसके द्वारा किया जा रहा है। इस संस्करणमें दोहे-चौपाइयोंका अर्थ वही है, जो 'मानसाङ्क'में था। पाठ एवं अर्थकी भूलोंके लिये हम अपने विज्ञ पाठक महानुभावोंसे क्षमा-प्रार्थना करते हैं और भगवान्की वस्तु विनम्रभावसे भगवान्की सेवामें अर्पण करते हैं।

विनीत—प्रकाशक