श्रीरामचरितमानस
Shri Ramcharitmanas
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 981, कुल 1058 में से
संदर्भ में पढ़ें- उत्तरकाण्ड *
१७१
एक बार अतिसय सब चरित किए रघुबीर।
सुमिरत प्रभु लीला सोड़ पुलकित भयउ सरीर ॥ ७५ (ख) ॥
एक बार श्रीरघुवीरने सब चरित्र बहुत अधिकतासे किये। प्रभुकी उस लीलाका स्मरण करते ही काकभुशुण्डिजीका शरीर [प्रेमानन्दवश] पुलकित हो गया ॥ ७५ (ख) ॥
कहइ भसुंड सुनहु खगनायक। राम चरित सेवक सुखदायक ॥
नृप मंदिर सुंदर सब भाँती। खचित कनक मनि नाना जाती ॥
भुशुण्डिजी कहने लगे—हे पक्षिराज! सुनिये, श्रीरामजीका चरित्र सेवकोंको सुख देनेवाला है। [अयोध्याका] राजमहल सब प्रकारसे सुन्दर है। सोनेके महलमें नाना प्रकारके रत्न जड़े हुए हैं ॥ १ ॥
बरनि न जाड़ रुचिर अँगनाई। जहाँ खेलहिं नित चारिउ भाई ॥
बालविनोद करत रघुराई। बिचरत अजिर जननि सुखदाई ॥
सुन्दर अँगनका वर्णन नहीं किया जा सकता, जहाँ चारों भाई नित्य खेलते हैं। माताको सुख देनेवाले बालविनोद करते हुए श्रीरघुनाथजी अँगनमें विचर रहे हैं ॥ २ ॥
मरकत मृदुल कलेवर स्यामा। अंग अंग प्रति छबि बहु कामा ॥
नव राजीव अरुन मृदु चरना। पदज रुचिर नख ससि दुति हरना ॥
मरकत मणिके समान हरिताभ श्याम और कोमल शरीर है। अङ्ग-अङ्गमें बहुत-से कामदेवोंकी शोभा छायी हुई है। नवीन [लाल] कमलके समान लाल-लाल कोमल चरण हैं। सुन्दर अँगुलियाँ हैं और नख अपनी ज्योतिसे चन्द्रमाकी कान्तिको हरनेवाले हैं ॥ ३ ॥
ललित अंक कुलिसादिक चारी। नूपुर चारु मधुर रवकारी ॥
चारु पुरट मनि रचित बनाई। कटि किंकिनि कल मुखर सुहाई ॥
[तलवेमें] वज्रादि (वज्र, अंकुश, ध्वजा और कमल) के चार सुन्दर चिह्न हैं, चरणोंमें मधुर शब्द करनेवाले सुन्दर नूपुर हैं, मणियों, रत्नोंसे जड़ी हुई सोनेकी बनी हुई सुन्दर करधनीका शब्द सुहावना लग रहा है ॥ ४ ॥
दो०—रेखा त्रय सुंदर उदर नाभी रुचिर गँभीर।
उर आयत भ्राजत बिबिधि बाल बिभूषन चीर ॥ ७६ ॥
उदरपर सुन्दर तीन रेखाएँ (त्रिवली) हैं, नाभि सुन्दर और गहरी है। विशाल वक्षःस्थलपर अनेकों प्रकारके बच्चोंके आभूषण और वस्त्र सुशोभित हैं ॥ ७६ ॥
अरुन पानि नख करज मनोहर। बाहु बिसाल बिभूषन सुंदर ॥
कंध बाल केहरि दर ग्रीवा। चारु चिबुक आनन छबि सीवा ॥