श्रीरामचरितमानस
Shri Ramcharitmanas
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
[१०५५]
स्थान—यह चौपाई सुन्दरकाण्डमें हनुमान्जीके लङ्कामें प्रवेश करनेके समयकी है।
फल—भगवान्का स्मरण करके कार्यारम्भ करो, सफलता मिलेगी।
३-उधरहि अंत न होइ निबाहू।
कालनेमि जिमि रावन राहू॥
स्थान—यह चौपाई बालकाण्डके आरम्भमें सत्संग-वर्णनके प्रसंगमें है।
फल—इस कार्यमें भलाई नहीं है। कार्यकी सफलतामें सन्देह है।
४-बिधि बस सुजन कुसंगत परहीं।
फनि मनि सम निज गुन अनुसरहीं॥
स्थान—यह चौपाई भी बालकाण्डके आरम्भमें ही सत्संग-वर्णनके प्रसंगकी है।
फल—खोटे मनुष्योंका संग छोड़ दो। कार्य पूर्ण होनेमें सन्देह है।
५-मुद मंगलमय संत समाजू।
जो जग जंगम तीरथराजू॥
स्थान—यह चौपाई बालकाण्डमें संत-समाजरूपी तीर्थके वर्णनमें है।
फल—प्रश्न उत्तम है। कार्य सिद्ध होगा।
६-गरल सुधा रिपु करहि मिताई।
गोपद सिंधु अनल सितलाई॥
स्थान—यह चौपाई श्रीहनुमान्जीके लङ्कामें प्रवेश करनेके समयकी है।
फल—प्रश्न बहुत श्रेष्ठ है। कार्य सफल होगा।
७-वरुन कुबेर सुरेस समीरा।
रन सन्मुख धरि काहूँ न धीरा॥
स्थान—यह चौपाई लङ्काकाण्डमें रावणकी मृत्युके पश्चात् मन्दोदरीके विलापके प्रसंगमें है।
फल—कार्य पूर्ण होनेमें सन्देह है।
८-सुफल मनोरथ होहूँ तुम्हारे।
रामु लखनु सुनि भाए सुखारे॥
स्थान—यह चौपाई बालकाण्डमें पुष्पवाटिकासे पुष्प लानेपर विश्वामित्रजीका आशीर्वाद है।
फल—प्रश्न बहुत उत्तम है। कार्य सिद्ध होगा।
इस प्रकार रामशलाका प्रश्नावलीसे कुल नौ चौपाइयाँ बनती हैं, जिनमें सभी प्रकारके प्रश्नोंके उत्तराशय सन्निहित हैं।
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