श्रीमद्भागवत महापुराण

श्रीमद्भागवत महापुराण
Shrimad Bhagavata Mahapurana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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आपको मैं बार-बार नमस्कार करता हूँ' ॥२४॥
इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां पञ्चमस्कन्धे सप्तदशोऽध्यायः ॥१७॥
१. प्रा० पा०—मोदमदमुदितराजहंसकलहंसजल०। २. प्रा० पा०—लोकाः स्वैरं विहरन्ति। ३. प्रा० पा०—व्यूहैरात्मनाद्यापि। ४. प्रा० पा०—पश्चाद्वक्ष्यामः। ५. प्रा० पा०—सहस्रैर्व्यवरुद्ध्यमानो ।
*भगवान्का विग्रह शुद्ध चिन्मय ही है परन्तु संहार आदि तामसी कार्योंका हेतु होनेसे इसे तामसी मूर्ति कहते हैं।