भारतकोश
श्रीमद्भागवत महापुराण

श्रीमद्भागवत महापुराण

Shrimad Bhagavata Mahapurana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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श्रीलोकयोर्हेतुः स मुक्तानन्ध्योऽतिदुर्लभः ।। १. प्रा० पा०—दुहितृश्च स्वसृभर्तॄन् कलत्रान् पित०। २. प्रा० पा०—यत्स्वी०। १. प्रा० पा०—संमुक्त०। २. प्रा० पा०—सूक्ष्मेषु च मह०। ३. प्रा० पा०—यथा। ४. प्रा० पा०—कालरूपेण।