श्रीमद्भागवत महापुराण
Shrimad Bhagavata Mahapurana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंस्तुति ९-प्रह्लादजीके द्वारा नृसिंहभगवान्की स्तुति १०-प्रह्लादजीके राज्याभिषेक और त्रिपुरदहनकी कथा ११-मानवधर्म, वर्णधर्म और स्त्रीधर्मका निरूपण १२-ब्रह्मचर्य और वानप्रस्थआश्रमोंके नियम १३-यतिधर्मका निरूपण और अवधूत-प्रह्लाद-संवाद १४-गृहस्थसम्बन्धी सदाचार १५-गृहस्थोंके लिये मोक्षधर्मका वर्णन
अष्टम स्कन्ध
१-मन्वन्तरोंका वर्णन २-ग्राहके द्वारा गजेन्द्रका पकड़ा जाना ३-गजेन्द्रके द्वारा भगवान्की स्तुति और उसका संकटसे मुक्त होना ४-गज और ग्राहका पूर्वचरित्र तथा उनका उद्धार ५-देवताओंका ब्रह्माजीके पास जाना और ब्रह्माकृत भगवान्की स्तुति ६-देवताओं और दैत्योंका मिलकर समुद्रमन्थनके लिये उद्योग करना ७-समुद्रमन्थनका आरम्भ और भगवान् शंकरका विषपान ८-समुद्रसे अमृतका प्रकट होना और भगवान्का मोहिनी-अवतार ग्रहण करना ९-मोहिनी-रूपसे भगवान्के द्वारा अमृत बाँटा जाना १०-देवासुर-संग्राम ११-देवासुर-संग्रामकी समाप्ति १२-मोहिनीरूपको देखकर महादेवजीका मोहित होना १३-आगामी सात मन्वन्तरोंका वर्णन १४-मनु आदिके पृथक्-पृथक् कर्मोंका निरूपण १५-राजा बलिकी स्वर्गपर विजय १६-कश्यपजीके द्वारा अदितिको पयोव्रतका उपदेश १७-भगवान्का प्रकट होकर अदितिको वर देना १८-वामनभगवान्का प्रकट होकर राजा बलिकी यज्ञशालामें पधारना १९-भगवान् वामनका बलिसे तीन पग पृथ्वी माँगना, बलिका वचन देना और शुक्राचार्यजीका उन्हें रोकना