श्रीमद्भागवत महापुराण
Shrimad Bhagavata Mahapurana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 1500, कुल 1617 में से
संदर्भ में पढ़ेंशङ्खतूर्यमृदङ्गानां भेरीडमरुणां१ महान् । हस्त्यश्वरथपत्तीनां नदतां निःस्वनोऽभवत् ।।७ रथिनो रथिभिस्तत्र पत्तिभिः सह पत्तयः । हया हयैरिभाश्चेभैः समसज्जन्त संयुगे ।।८ उष्ट्रैः केचिदिभैः केचिदपरे युयुधुः खरैः । केचिद् गौरमृगैर्ऋक्षैर्द्धीपिभिर्हरिभिर्भटाः ।।९ गृध्रैः कङ्कबकै रन्ये श्येनभासैस्तिमिङ्गिलैः । शरभैर्महिषैः खड्गैर्गोवृषैर्गवयारुणैः ।।१० शिवाभिराखुभिः केचित् कृकलासैः शशैनरैः२ । बस्तैरेके३ कृष्णसारैर्हंसैरन्ये च सूकरैः ।।११ अन्ये जलस्थलखगैः सत्त्वैर्विकृतविग्रहैः । सेनयोरुभयो राजन्न्विविशुस्तेऽग्रतोऽग्रतः ।।१२ चित्रध्वजपटै राजन्नातपत्रैः सितामलैः । महाधनैर्वज्रदण्डैर्व्यजनैर्बार्हचामरैः४ ।।१३ वातोद्धूतोत्तरोष्णीषैरर्चिर्भिर्वर्मभूषणैः । स्फुरद्भिर्विशदैः शस्त्रैः सुतरां सूर्यरश्मिभिः ।।१४ देवदानववीराणां ध्वजिन्यौ पाण्डुनन्दन । रेजतुर्वीिरमालाभिर्यादसामिव सागरौ ।।१५ वैरोचनो बलिः संख्ये सोऽसुराणां चमूपतिः । यानं वैहायसं नाम कामगं मयनिर्मितम् ।।१६
दोनों ही एक-दूसरेके प्रबल शत्रु हो रहे थे, दोनों ही क्रोधसे भरे हुए थे। एक-दूसरेको आमने-सामने पाकर तलवार, बाण और अन्य अनेकानेक अस्त्र-शस्त्रोंसे परस्पर चोट पहुँचाने लगे ।।६।। उस समय लड़ाईमें शङ्ख, तुरही, मृदंग, नगारे और डमरू बड़े जोरसे बजने लगे; हाथियोंकी चिग्घाड़, घोड़ोंकी हिनहिनाहट, रथोंकी घरघराहट और पैदल सेनाकी चिल्लाहटसे बड़ा कोलाहल मच गया ।।७।। रणभूमिमें रथियोंके साथ रथी, पैदलके साथ पैदल, घुड़सवारोंके साथ घुड़सवार एवं हाथीवालोंके साथ हाथीवाले भिड़ गये ।।८।। उनमेंसे कोई-कोई वीर ऊँटोंपर, हाथियोंपर और गधोंपर चढ़कर लड़ रहे थे तो कोई-कोई गौरमृग, भालू, बाघ और सिंहोंपर ।।९।। कोई-कोई सैनिक गिद्ध, कंक, बगुले, बाज और भास पक्षियोंपर चढ़े हुए थे तो बहुत-से तिमिङ्गिल मच्छ, शरभ, भैंसे, गैंडे, बैल, नीलगाय और जंगली साँड़ोंपर सवार थे ।।१०।।
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