श्रीमद्भागवत महापुराण

श्रीमद्भागवत महापुराण
Shrimad Bhagavata Mahapurana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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बलि यह बात समझते थे कि संसारमें जीवन-मृत्यु, जय-पराजय आदि उलट-फेर होते ही रहते हैं। इसलिये पराजित होनेपर भी उन्हें किसी प्रकारका खेद नहीं हुआ ।।४८।।
इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायामष्टमस्कन्धे देवासुरसंग्रामे एकादशोऽध्यायः ।।११।।
१. प्रा० पा०—बलम्। २. प्रा० पा०—लं च परं ययौ। ३. प्रा० पा०—मुचिः सबलः। ४. प्रा० पा०—पेतुश्च रोषिताः।
१. प्रा० पा०—विन०।
१. प्रा० पा०—जाक्षये। २. प्रा० पा०—वि०। ३. प्रा० पा०—चातिबलो०। ४. प्रा० पा०—वज्रं।