श्रीमद्भागवत महापुराण

श्रीमद्भागवत महापुराण
Shrimad Bhagavata Mahapurana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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पौरवेन्द्रोऽभ्यभाषत ।। नाहं वेद गतिं पित्रोर्भगवन् क्व गताविति । कर्णधार इवापारे सीदतां पारदर्शकः ।। नारद उवाच— ‘मा कञ्चन शुचो राजन् यदीश्वरवशे जगत् । लोकाः सपाला यस्येमे वहन्ति बलिमीशितुः’ १. प्रा ० पा०—इत्युक्त्वा चारुहत् । * देवर्षि नारदजी त्रिकालदर्शी हैं। वे धृतराष्ट्रके भविष्य-जीवनको वर्तमानकी भाँति प्रत्यक्ष देखते हुए उसी रूपमें वर्णन कर रहे हैं। धृतराष्ट्र पिछली रातको ही हस्तिनापुरसे गये हैं; अतः यह वर्णन भविष्यका ही समझना चाहिये।