श्रीमद्भागवत महापुराण

श्रीमद्भागवत महापुराण
Shrimad Bhagavata Mahapurana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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पपुर्ज्ञानमयं सौम्या यन्मुखाम्बुरुहासवम् ॥२४
एतदेवात्मभू राजन् नारदाय विपृच्छते। वेदगर्भोऽभ्यधात् साक्षात्$^३$ यदाह हरिरात्मनः ॥२५
परीक्षित्! वेदगर्भ स्वयम्भू ब्रह्मा ने नारदके प्रश्न करनेपर यही बात कही थी, जिसका स्वयं भगवान् नारायणने उन्हें उपदेश किया था (और वही मैं तुमसे कह रहा हूँ) ॥२५॥
इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां द्वितीयस्कन्धे चतुर्थोऽध्यायः ॥४॥
१. प्रा० पा०—वितन्वतोऽजस्य। २. प्रा० पा०—विलक्षणा। ३. प्रा० पा०—सर्वं यदाह हरीरिश्वरः।