भारतकोश
श्रीमद्भागवत महापुराण

श्रीमद्भागवत महापुराण

Shrimad Bhagavata Mahapurana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished1,617 पृष्ठ

पृष्ठ 482, कुल 1617 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 482

तदाहुरक्षरं ब्रह्म सर्वकारणकारणम्।

विष्णोर्धाम परं साक्षात्पुरुषस्य महात्मनः ॥४१

उसी परार्धके अन्तमें जो कल्प हुआ था, उसे पाद्मकल्प कहते हैं। इसमें भगवान्‌के

नाभिसरोवरसे सर्वलोकमय कमल प्रकट हुआ था ॥३५॥ विदुरजी! इस समय जो कल्प चल

रहा है, वह दूसरे परार्धका आरम्भक बतलाया जाता है। यह वाराहकल्प-नामसे विख्यात है,

इसमें भगवान्‌ने सूकररूप धारण किया था ॥३६॥ यह दो परार्धका काल अव्यक्त, अनन्त,

अनादि, विश्वात्मा श्रीहरिका एक निमेष माना जाता है ॥३७॥ यह परमाणुसे लेकर

द्विपरार्धपर्यन्त फैला हुआ काल सर्वसमर्थ होनेपर भी सर्वात्मा श्रीहरिपर किसी प्रकारकी

प्रभुता नहीं रखता। यह तो देहादिमें अभिमान रखनेवाले जीवोंका ही शासन करनेमें समर्थ

है ॥३८॥

प्रकृति, महत्तत्त्व, अहंकार और पंचतन्मात्र—इन आठ प्रकृतियोंके सहित दस इन्द्रियाँ,

मन और पंचभूत—इन सोलह विकारोंसे मिलकर बना हुआ यह ब्रह्माण्डकोश भीतरसे पचास

करोड़ योजन विस्तारवाला है तथा इसके बाहर चारों ओर उत्तरोत्तर दस-दस गुने सात

आवरण हैं। उन सबके सहित यह जिसमें परमाणुके समान पड़ा हुआ दीखता है और जिसमें

ऐसी करोड़ों ब्रह्माण्डराशियाँ हैं, वह इन प्रधानादि समस्त कारणोंका कारण अक्षर ब्रह्म

कहलाता है और यही पुराणपुरुष परमात्मा श्रीविष्णुभगवान्‌का श्रेष्ठ धाम (स्वरूप)

है ॥३९-४१॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां तृतीयस्कन्धे एकादशोऽध्यायः ॥११॥

१. प्रा० पा०—सूक्ष्मे स्थूले च। २. प्रा० पा०—कालः स। ३. प्रा० पा०—अणू द्वौ

द्वयणुकः प्रोक्तः त्र०। ४. प्रा० पा०—जालाक्षार्करश्मिगतः। ५. प्रा० पा०—पतन्न गाम्। इसका

उल्लेख श्रीधरस्वामीने भी किया है।

१. प्रा० पा०—श्रुतम्। २. प्रा० पा०—दृक्। ३. प्रा० पा०—वर्धते ।

  • अर्थात् सत्ययुगमें ४००० दिव्य वर्ष युगके और ८०० सन्ध्या एवं सन्ध्यांशके—इस

प्रकार ४८०० वर्ष होते हैं। इसी प्रकार त्रेतामें ३६००, द्वापरमें २४०० और कलियुगमें १२००

दिव्य वर्ष होते हैं। मनुष्योंका एक वर्ष देवताओंका एक दिन होता है, अतः देवताओंका एक

वर्ष मनुष्योंके ३६० वर्षके बराबर हुआ। इस प्रकार मानवीय मानसे कलियुगमें ४३२००० वर्ष

हुए तथा इससे दुगुने द्वापरमें, तिगुने त्रेतामें और चौगुने सत्ययुगमें होते हैं।

ebook converter DEMO Watermarks*