श्रीमद्भागवत महापुराण

श्रीमद्भागवत महापुराण
Shrimad Bhagavata Mahapurana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां तृतीयस्कन्धे 'कापिलेयोपाख्याने' एकोनत्रिंशोऽध्यायः ॥२९॥
१. प्रा० पा०—रतः। २. प्रा० पा०—च।
१. भगवान्के नित्यधाममें निवास, २. भगवान्के समान ऐश्वर्यभोग, ३. भगवान्की नित्यसमीपता, ४. भगवान्का-सा रूप और ५. भगवान्के विग्रहमें समा जाना, उनसे एक हो जाना या ब्रह्मरूप प्राप्त कर लेना।
१. प्रा० पा०—विदस्तेभ्यस्ततश्चोभयवेदिनः। २. प्रा० पा०—पादास्ततो।