भारतकोश
श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण

श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण

Shrimad Valmiki Ramayana

महर्षि वाल्मीकि द्वारा

DevanagariHindipublished2,621 पृष्ठ

पृष्ठ 1567, कुल 2621 में से

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पैंतालीसवाँ सर्ग

मन्त्रीके सात पुत्रोंका वध

राक्षसोंके राजा रावणकी आज्ञा पाकर मन्त्रीके सात बेटे,जो अग्निके समान तेजस्वी थे, उस राजमहलसे बाहर निकले॥ १ ॥

उनके साथ बहुत बड़ी सेना थी। वे अत्यन्त बलवान्, धनुर्धर, अस्त्रवेत्ताओंमें श्रेष्ठ तथा परस्पर होड़ लगाकर शत्रुपर विजय पानेकी इच्छा रखनेवाले थे॥ २ ॥

उनके घोड़े जुते हुए विशाल रथ सोनेकी जालीसे ढके हुए थे। उनपर ध्वजा-पताकाएँ फहरा रही थीं और उनके पहियोंके चलनेसे मेघोंकी गम्भीर गर्जनाके समान ध्वनि होती थी। ऐसे रथोंपर सवार हो वे अमित पराक्रमी मन्त्रिकुमार तपाये हुए सोनेसे चित्रित अपने धनुषोंकी टङ्कार करते हुए बड़े हर्ष और उत्साहके साथ आगे बढ़े। उस समय वे सब-के-सब विद्युतसहित मेघके समान शोभा पाते थे॥ ३-४ ॥

तब, पहले जो किंकर नामक राक्षस मारे गये थे, उनकी मृत्युका समाचार पाकर इन सबकी माताएँ अमङ्गलकी आशङ्कासे भार्ऽ-बन्धु और सुहृदोंसहित शोकसे घबरा उठीं॥ ५ ॥

तपाये हुए सोनेके आभूषणोंसे विभूषित वे सातों वीर परस्पर होड़-सी लगाकर फाटकपर खड़े हुए हनुमान्जीपर टूट पड़े॥ ६ ॥

जैसे वर्षाकालमें मेघ वर्षा करते हुए विचरते हैं, उसी प्रकार वे राक्षसरूपी बादल बाणोंकी वर्षा करते हुए वहाँ विचरण करने लगे। रथोंकी घर्घराहट ही उनकी गर्जना थी॥ ७ ॥

तदनन्तर राक्षसोंद्वारा की गयी उस बाण-वर्षासे हनुमान्जी उसी तरह आच्छादित हो गये, जैसे कोर्ऽ गिरिराज जलकी वर्षासे ढक गया हो॥ ८ ॥

उस समय निर्मल आकाशमें शीघ्रतापूर्वक विचरते हुए कपिवर हनुमान् उन राक्षसवीरोंके बाणों तथा रथके वेगोंको व्यर्थ करते हुए अपने-आपको बचाने लगे॥ ९ ॥

जैसे व्योममण्डलमें शक्तिशाली वायुदेव इन्द्रधनुषयुक्त मेघोंके साथ क्रीडा करते हैं, उसी प्रकार वीर पवनकुमार उन धनुर्धर वीरोंके साथ खेल-सा करते हुए आकाशमें अद्भुत शोभा पा रहे थे॥ १० ॥

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