भारतकोश
श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण

श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण

Shrimad Valmiki Ramayana

महर्षि वाल्मीकि द्वारा

DevanagariHindipublished2,621 पृष्ठ

पृष्ठ 1694, कुल 2621 में से

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पृष्ठ 1694

‘राजन्! फिर ब्रह्माजीके कहनेसे इन्होंने शम्बर और वृत्रासुरको मारनेवाले सर्वदेववन्दित इन्द्रको मुक्त किया। तब वे स्वर्गलोकमें गये॥ २३ ॥

‘अतः महाराज! इस कामके लिये आप राजकुमार इन्द्रजित्को ही भेजिये, जिससे ये रामसहित वानर-सेनाका यहाँ आनेसे पहले ही संहार कर डालें॥ २४ ॥

‘राजन्! साधारण नर और वानरोंसे प्राप्त हुई इस आपत्तिके विषयमें चिन्ता करना आपके लिये उचित नहीं है। आपको तो अपने हृदयमें इसे स्थान ही नहीं देना चाहिये। आप अवश्य ही रामका वध कर डालेंगे’॥ २५ ॥

इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके युद्धकाण्डमें सातवाँ सर्ग पूरा हुआ॥
७ ॥

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