श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण
Shrimad Valmiki Ramayana
महर्षि वाल्मीकि द्वारा
पृष्ठ 2019, कुल 2621 में से
संदर्भ में पढ़ेंइतनेहीमें प्रजङ्घको साथ लिये बलवान् वीर यूपाक्षने कुपित हो रथके द्वारा महाबली वालिपुत्रपर आक्रमण किया॥ १२ ॥
इसी बीचमें सोनेके बाजूबंद पहने वीर शोणिताक्षने अपनेको सँभालकर लोहेकी गदा उठायी और अङ्गदका ही पीछा किया॥ १३ ॥
फिर यूपाक्षसहित बलवान् महावीर प्रजङ्घ कुपित हो महाबली वालिपुत्रपर गदा लेकर चढ़ आया॥ १४ ॥
शोणिताक्ष और प्रजङ्घ दोनों राक्षसोंके बीचमें कपिश्रेष्ठ अङ्गद वैसी ही शोभा पा रहे थे, जैसे दोनों विशाखा नक्षत्रोंके बीचमें पूर्ण चन्द्रमा सुशोभित होते हैं॥
उस समय मैन्द और द्विविद अङ्गदकी रक्षा करनेके लिये उनके निकट आकर खड़े हो गये। वे दोनों अपने-अपने योग्य विपक्षी योद्धाकी तलाश भी कर रहे थे॥ १६ ॥
इतनेहीमें तलवार, बाण और गदा धारण किये बहुत-से महाबली विशालकाय राक्षस रोषपूर्वक वानरोंपर टूट पड़े॥ १७ ॥
ये तीन वानर-सेनापति उन तीन प्रमुख राक्षसोंके साथ उलझे हुए थे। उस समय उनमें रोंगटे खड़े कर देनेवाला महान् युद्ध छिड़ गया॥ १८ ॥
उन तीनों वानरोंने रणभूमिमें वृक्ष ले-लेकर युद्धमें निशाचरोंपर चलाये, परंतु महाबली प्रजङ्घने अपनी तलवारसे उन सब वृक्षोंको काट गिराया॥ १९ ॥
तत्पश्चात् उन्होंने रणभूमिमें उन राक्षसोंके रथों और घोड़ोंपर वृक्ष तथा पर्वतशिखर चलाये; परंतु महाबली यूपाक्षने अपने बाणसमूहोंसे उनके टुकड़े-टुकड़े कर डाले॥ २० ॥
मैन्द और द्विविदने जिन-जिन वृक्षोंको उखाड़-उखाड़कर उन राक्षसोंपर चलाया था, उन सबको बल-विक्रमशाली और प्रतापी शोणिताक्षने गदा मारकर बीचमें ही तोड़ डाला॥ २१ ॥
तत्पश्चात् प्रजङ्घने शत्रुओंके मर्मको विदीर्ण करनेवाली एक बहुत बड़ी तलवार उठाकर वालिपुत्र अङ्गदपर वेगपूर्वक आक्रमण किया॥ २२ ॥
उसे निकट आया देख अतिशय शक्तिशाली महाबली वानरराज अङ्गदने अश्वकर्ण नामक वृक्षसे मारा। साथ ही उसकी बाँहपर, जिसमें तलवार थी, उन्होंने एक घूसा मारा। वालिपुत्रके उस आघातसे वह तलवार छूटकर पृथ्वीपर जा गिरी॥ २३-२४ ॥