भारतकोश
श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण

श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण

Shrimad Valmiki Ramayana

महर्षि वाल्मीकि द्वारा

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पृष्ठ 2099

‘दशमुख रावण जनकनन्दिनी सीताको कभी नहीं पा सकेगा; परंतु उसने बलवान् रघुनाथजीसे अमिट वैर बाँध लिया है॥ १२ ॥

‘राक्षस विराध विदेहकुमारी सीताको प्राप्त करना चाहता है, यह देख श्रीरामने एक ही बाणसे उसका काम तमाम कर दिया। वह एक ही दृष्टान्त उनकी अजेय शक्तिको समझनेके लिये काफी था॥ १३ ॥

‘जनस्थानमें भयानक कर्म करनेवाले चौदह हजार राक्षसोंको श्रीरामने अग्निशिखाके समान तेजस्वी बाणोंद्वारा कालके गालमें डाल दिया था और सूर्यके सदृश प्रकाशमान सायकोंसे समराङ्गणमें खर, दूषण तथा त्रिशिराका भी संहार कर डाला था; यह उनकी अजेयताको समझ लेनेके लिये पर्याप्त दृष्टान्त था॥ १४-१५ ॥

‘रक्तभोजी राक्षस कबन्धकी बाँहें एक-एक योजन लम्बी थीं और वह क्रोधवश बड़े जोर-जोरसे सिंहनाद करता था तो भी वह श्रीरामके हाथसे मारा गया। वह दृष्टान्त ही श्रीरामचन्द्रजीके दुर्जय पराक्रमका ज्ञान करानेके लिये पर्याप्त था॥ १६ ॥

‘मेरुपर्वतके समान महाकाय बलवान् इन्द्रकुमार वालीको श्रीरामचन्द्रजीने एक ही बाणसे मार गिराया। उनकी शक्तिका अनुमान लगानेके लिये वह एक ही उदाहरण काफी है॥ १७ ॥

‘सुग्रीव बहुत ही दुःखी और निराश होकर ऋष्यमूक पर्वतपर निवास करते थे; परंतु श्रीरामने उन्हें किष्किन्धाके राजसिंहासनपर बिठा दिया। उनके प्रभावको समझनेके लिये वह एक ही दृष्टान्त पर्याप्त है॥ १८ ॥

‘विभीषणने जो धर्म और अर्थसे युक्त बात कही थी, वह सभी राक्षसोंके लिये हितकर तथा युक्तियुक्त थी; परंतु मोहवश रावणको वह अच्छी न लगी। यदि कुबेरका छोटा भाई रावण विभीषणकी बात मान लेता तो यह लङ्कापुरी इस तरह दुःखसे पीड़ित हो श्मशानभूमि नहीं बन जाती॥ १९-२० ॥

‘महाबली कुम्भकर्ण श्रीरामके हाथसे मारा गया। दुःसह वीर अतिकायको लक्ष्मणने मार गिराया तथा रावणका प्यारा पुत्र इन्द्रजित् भी उन्हींके हाथसे मारा गया तथापि रावण भगवान् श्रीरामके प्रभावको नहीं समझ रहा है॥ २१ ॥

‘हाय, मेरा बेटा मारा गया!’ ‘मेरे भाईको प्राणोंसे हाथ धोना पड़ा।’ ‘रणभूमिमें मेरे पतिदेव मार डाले गये।’ लङ्काके घर-घरमें राक्षसियोंके ये शब्द सुनायी देते हैं॥ २२ ॥